Monday, December 31, 2018

पाकिस्तान में 300 रु लेकिन भारत में 20 रु किलो बिक रहे थे टमाटर

भारत और पाकिस्तान की व्यापार क्षमता 2591 अरब रुपए है, यानी दोनों एक-दूसरे के साथ इतना व्यापार कर सकते हैं. लेकिन कई कारणों से दोनों देशों के बीच सिर्फ़ 140 अरब रुपए का ही व्यापार हो पा रहा है.

वर्ल्ड बैंक की हालिया स्टडी में ये बात निकलकर सामने आई है. इसी महीने की शुरुआत में जारी की गई इस स्टडी का नाम है 'अ ग्लास हाफ़ फ़ुल, द प्रोमिस ऑफ़ रिजनल ट्रेड इन साउथ एशिया.'

वर्ल्ड बैंक ने वाघा/अटारी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) के ज़रिए हो रहे व्यापार के आधार पर ये रिपोर्ट तैयार की है.

दरअसल इन चेक पोस्टों के ज़रिए भारत से पाकिस्तान आने वाले फलों और सब्ज़ियों के व्यापार पर रोक लगा दी गई है.

इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट से फलों और सब्ज़ियों की आवाजाही पर पाबंदी की वजह से भारत के किसानों को अपनी फ़सल औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही है. वहीं सीमा के दूसरी ओर पाकिस्तान के लोगों को यही चीज़ें ऊंचे दाम में ख़रीदनी पड़ रही है.

सीधे शब्दों में कहें तो इसकी वजह से दोनों ही देशों के लोगों का नुक़सान हो रहा है.

भारत के किसान और व्यापारियों पर अटारी स्थित इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट से फल, सब्ज़ियां और ऐसे दूसरे सामान निर्यात करने को लेकर वित्तीय वर्ष 2017-18 से बैन लगा हुआ है.

पड़ोसी देशों से व्यापार बढ़ाने के लिए भारत ने 13 अप्रैल 2012 में आईपीसी का उद्घाटन किया था.

हालांकि वित्तीय वर्ष 2015-16 और 2016-17 में फलों और सब्ज़ियों का निर्यात क्रमश: 338 करोड़ रुपए और 369 करोड़ रुपए रहा था.

2015-16 के दौरान कुल 6057 ट्रक 273.26 करोड़ रुपए की क़ीमत की 124277 मैट्रिक टन सब्ज़ियां और 646 ट्रक 65.27 करोड़ रुपए की क़ीमत का 20608 मैट्रिक टन सोयाबीन लेकर इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के ज़रिए भारत से पाकिस्तान गए.

वहीं 2016-17 में भारत ने 10495 ट्रकों में भरकर 360.67 करोड़ रुपए क़ीमत की 186149 मैट्रिक टन सब्ज़ियां निर्यात की.

हालांकि भारत से होने वाला सोयाबीन का निर्यात गिरा. आईसीपी के ज़रिए सिर्फ़ 94 ट्रक 147.9 करोड़ की क़ीमत का 3056 मैट्रिक टन सोयाबीन लेकर सीमापार पहुंचे.

पाकिस्तान आईसीपी के ज़रिए सूखे मेवे, सीमेंट, ग्लास, सोडा, चूना, नमक, एल्युमीनियम समेत कई सामान निर्यात करता है.

2015-16 के दौरान आईसीपी के ज़रिए पाकिस्तान से 39823 ट्रक 2414.08 करोड़ रुपए का 1843600 मैट्रिक टन का सामान निर्यात किया गया.

2017-18 में पाकिस्तान का निर्यात बढ़ा और उसके 44890 ट्रक 3403.95 करोड़ रुपए की कीमत का 2297932 मैट्रिक टन सामान लेकर भारत पहुंचे.

वहीं 2018-19 में नवंबर तक पाकिस्तान से 2471.72 करोड़ रुपए के 1700715 मैट्रिक टन सूखे मेवे, सीमेंट, चूना आदि आईसीपी के ज़रिए भारत के बाज़ारों में पहुंचा.

अमृतसर में भारत-पाक व्यापारियों के संगठन के अध्यक्ष राजदीप उप्पल ने बीबीसी से कहा कि सब्ज़ियों पर अनाधिकारिक व्यापारिक प्रतिबंध तकनीकी से ज़्यादा राजनीतिक फ़ैसला लगता है.

उप्पल पाकिस्तान के पिछले साल के टमाटर संकट को याद करते हुए बताते हैं, "उस वक़्त पाकिस्तान में टमाटर के दाम 300 रुपए प्रति किलो पहुंच गए थे, लेकिन लाहौर से सिर्फ़ 40 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद अमृतसर में टमाटर के दाम 20 रुपए के आस-पास थे."

उप्पल के मुताबिक़ बेवजह के व्यापार प्रतिबंधों का असर पाकिस्तान के लोगों की जेब पर पड़ा.

वर्ल्ड बैंक का अध्ययन भी राजदीप उप्पल की बात की तस्दीक़ करता है. अध्ययन के मुताबिक़ दोनों देशों के बीच व्यापार कम होने की वजह भरोसे और पारदर्शिता की कमी, साथ ही सीमा शुल्क जैसे कारण हैं.

Thursday, December 27, 2018

महिलाओं के हक़ और इंसाफ़ के लिए एक बड़ा साल

जेंडर के लिहाज़ से यूं तो 2018 भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ जारी हिंसा की सैकड़ों वीभत्स घटनाओं से भरा रहा लेकिन इन अपराधों को कम करने के लिए क़ानून में कुछ बड़े बदलाव भी किए गए.

सर्वोच्च न्यायालय ने बीते साल सबरीमला मंदिर विवाद और अडल्ट्री के मुद्दों पर महिलाओं के पक्ष में दो महत्त्वपूर्ण फ़ैसले दिए. इन सब घटनाओं के साथ ही अमरीका से शुरू हुए 'मी टू' आंदोलन ने भारत के दरवाज़े पर पहली दस्तक भी 2018 में ही दी.

महिलाओं के मुद्दों से जुड़ी, बीते साल की अहम घटनाओं पर एक नज़र-

कठुआ हादसा और बच्चों से बलात्कार के मामलों में मृत्यु दंड की घोषणा
जनवरी 2018 में जम्मू से सटे कठुआ क़स्बे में एक आठ साल की बच्ची के साथ हुए सामूहिक बलात्कार की घटना ने पूरे देश को हिला दिया. इस यौन हमले के बाद की गई बच्ची की निर्मम हत्या ने एक बाद फिर भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा के मुद्दे को आम लोगों में चिंता और चर्चा का विषय बना दिया. सड़कों पर देश-व्यापी विरोध प्रदर्शन हुए और बच्चों के ख़िलाफ़ बढ़ रही यौन हिंसा के मामलों पर नए सख़्त क़ानूनों की मांग बढ़ी.

लोकसभा ने छह महीनों के भीतर ही आपराधिक क़ानून संशोधन विधेयक पर चर्चा के बाद उसे पास कर दिया. आपराधिक क़ानून में इस बदलाव के बाद से अब 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार के मामलों में दोषियों को मृत्युदंड तक की सज़ा सुनाई जा सकती है. इससे पहले साल 2012 में दिल्ली में एक चलती बस में कॉलेज की छात्रा 'निर्भया' के बलात्कार के बाद अगले साल क़ानून में संशोधन कर बलात्कार के लिए अधिकतम मौत की सज़ा का प्रावधान लाया गया था.

अभियान ने इस सितम्बर में तब दस्तक दी जब फ़िल्म अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने दस साल पहले हुए एक मामले में नाना पाटेकर के ख़िलाफ़ उत्पीड़न के आरोप लगाए. इसके बाद इस अभियान के तहत फ़िल्म, कला और मीडिया से जुड़ी कई महिलाओं ने अपने साथ हुई प्रताड़ना, उत्पीड़न की घटनाओं पर खुलकर बात की. महिलाओं द्वारा लगाए लगे आरोपों के दायरे में कई नामी हस्तियां जैसे नाना पाटेकर, विकास बहल, उत्सव चक्रवर्ती, आलोक नाथ और एमजे अकबर के नाम शामिल थे. यौन शोषण के आरोपों से घिरने के बाद एम जे अकबर ने विदेश राज्य मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

सितम्बर 2018 में ही दिए गए एक ऐतिहासिक फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 150 साल पुराने 'अडल्ट्री' या 'व्याभिचार' के क़ानून को रद्द कर दिया. सर्वोच्च अदालत में दायर जनहित याचिका पर फ़ैसला सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि 'ऐसा कोई भी क़ानून जो व्यक्ति कि गरिमा और महिलाओं के साथ समान व्यवहार को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, वह संविधान के ख़िलाफ़ है.'

इस संदर्भ में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 497 को मनमाना और अप्रासंगिक घोषित करते हुए जस्टिस मिश्रा ने जोड़ा, "अब यह कहने का वक़्त आ गया है कि शादी में पति, पत्नी का मालिक नहीं होता है. स्त्री या पुरुष में से किसी एक की दूसरे पर क़ानूनी सम्प्रभुता पूरी तरह ग़लत है."

पुराना अडल्ट्री क़ानून 1860 में बना था. आईपीसी की धारा 497 में इसे पारिभाषित करते हुए कहा गया था, अगर कोई मर्द किसी दूसरी शादीशुदा औरत के साथ उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाता है, तो पति की शिकायत पर इस मामले में पुरुष को अडल्ट्री क़ानून के तहत आरोप लगाकर मुक़दमा चलाया जा सकता था. ऐसा करने पर पुरुष को पांच साल की क़ैद और जुर्माना या फिर दोनों ही सज़ा का प्रावधान भी था. हालांकि इस क़ानून में एक पेंच यह भी था कि अगर कोई शादीशुदा मर्द किसी कुंवारी या विधवा औरत से शारीरिक संबंध बनाता है तो वह अडल्ट्री के तहत दोषी नहीं माना जाता था.

सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटी
एक जनहित याचिका पर 12 साल तक चली सुनवाई के बाद सितम्बर में आख़िरकार सर्वोच्च न्यायालय ने केरल के सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी. हिंदुओं के एक प्रमुख तीर्थ स्थल के तौर पर पहचाने जाने वाले सबरीमला मंदिर में सैकड़ों सालों से माहवारी की उम्र वाली महिलाओं का प्रवेश वर्जित रहा है.

Monday, December 17, 2018

जन्मभूमि पर राम का ही मंदिर बनेगा, आपसी सहमति से निकलेगा हल: गडकरी

आजतक के खास कार्यक्रम 'एजेंडा आजतक 2018' का आज दूसरा दिन है. दूसरे दिन की शुरुआत केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ हुई. '2019 का रोड मैप' सेशन का संचालन रोहित सरदाना ने किया. इस सत्र में नितिन गडकरी ने राम मंदिर के मुद्दे पर भी खुल कर बात की.

नितिन गडकरी ने कहा कि अयोध्या का मुद्दा धर्म का नहीं है, ये जनभावनाओं से जुड़ा है. अगर राम के जन्मस्थान पर मंदिर नहीं बनेगा तो किधर बनेगा. ये भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे में पहले भी था और आज भी है. उन्होंने कहा कि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है लेकिन अभी भी आपसी बातचीत से मुद्दा सुलझ सकता है.

पूर्व बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि हमने जो पालमपुर की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में वादा किया था उसी पर आज ही कायम हैं. लेकिन हम कोर्ट में हैं. गडकरी ने कहा कि राम मंदिर बनाने के तीन रास्ते हैं. पहला सुप्रीम कोर्ट के फैसले से, दूसरा आपसी बातचीत से और तीसरा संसद में कानून लाने से.

सुप्रीम कोर्ट में है मामला

गौरतलब है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है. सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर में होने वाली सुनवाई को टाल दिया था, अब इस मसले की सुनवाई जनवरी 2019 में होगी. पिछले कुछ समय में राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, वीएचपी समेत कई अन्य हिंदू संगठनों ने राम मंदिर निर्माण को लेकर सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है.

आपको बता दें कि नितिन गडकरी ने एजेंडा आजतक के मंच पर कई मुद्दों पर बात की. उन्होंने इस दौरान उनके मंत्रालय द्वारा किए जा रहे कामों को भी गिनाया. जब गडकरी से पूछा गया कि क्या वह 2019 में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं तो उन्होंने कहा कि वह सपने नहीं देखते हैं. 2019 में बीजेपी पूरे बहुमत के साथ सत्ता में आएगी और नरेंद्र मोदी ही देश के प्रधानमंत्री बनेंगे.

सराही गई है रीमा दास की फिल्म

इस फिल्म ने 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए 'स्वर्ण कमल' का पुरस्कार जीता था. बाद में सीधे ऑस्कर्स में एंट्री मिलना कलाकारों और मेकर्स के लिए बहुत बड़ी बात है. ये फ़िल्म साल 2017 में आई थी जिसका प्रीमियर टोरंटो फ़िल्म फेस्टिवल में किया गया था. रीमा फिल्म की प्रोड्यूसर और एडिटर भी हैं.

इन फिल्मों को पछाड़कर ऑस्कर के लिए भेजी गई थी फिल्म

विलेज रॉकस्टार्स ने ऑस्कर्स के नॉमिनेशन के लिए कई बड़ी फिल्मों को पछाड़ा था, जिसमें पद्मावत, राज़ी, हिचकी, अक्टूबर, लव सोनिया, पिहू, कड़वी हवा, मैं गायत्री जाधव, बिस्कोपवाला, मंटो,102 नॉट आउट, पैडमन, अज्जी जैसी हिंदी फिल्में शामिल थीं.

Friday, December 14, 2018

कमलनाथ को इंदिरा मानती थीं 'तीसरा बेटा', संजय गांधी के लिए गए थे जेल

मध्य प्रदेश में 15 साल का वनवास खत्म कर कांग्रेस एक बार फिर सरकार बनाने जा रही है. कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ राज्य के मुख्यमंत्री होंगे. भोपाल में देर रात कांग्रेस विधायकों की बैठक हुई, जिसमें उन्हें नेता चुन लिया गया.

बता दें कि 11 दिसंबर को आए विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद से कांग्रेस में सीएम पद को लेकर माथापच्ची चल रही थी. मुख्यमंत्री पद के लिए कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा थी. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तरफ से कमलनाथ के नाम पर मुहर लगी.

इंदिरा गांधी का तीसरा बेटा बना सीएम

कमलनाथ को आठ महीने पहले ही मध्य प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था. जब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, तब ये बात फिर से चर्चा में आई कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उन्हें अपना 'तीसरा बेटा' मानती थीं.

दरअसल, एक बार इंदिरा गांधी छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से लड़ रहे कमलनाथ के लिए चुनाव प्रचार करने आई थीं. इंदिरा ने तब चुनावी रैली में लोगों से कहा था, 'कमलनाथ मेरे लिए तीसरे बेटे जैसे हैं. कृपया उन्हें वोट दीजिए'

साल 1979 में कमलनाथ ने मोरारजी देसाई की सरकार से मुकाबला करने में कांग्रेस की मदद की थी. कमलनाथ संजय गांधी के हॉस्टलमेट थे और आपातकाल के बाद मोरारजी देसाई की सरकार में उनके लिए जेल भी गए थे. 39 साल बाद 72 साल के कमलनाथ ने अब इंदिरा गांधी के पोते कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए भी मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में दमदार भूमिका निभाई है.

कमलनाथ का सफर

कमलनाथ की गिनती देश के दिग्गज राजनेताओं में होती है. मध्य प्रदेश ने देश को जितने भी नामी राजनेता दिए हैं उनमें से एक कमलनाथ भी हैं.  18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मे कमलनाथ की स्कूली पढ़ाई मशहूर दून स्कूल से हुई. दून स्कूल में उनकी जान पहचान कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे संजय गांधी से हुई. दून स्कूल से पढ़ाई करने के बाद कमलनाथ ने कोलकाता के सेंट जेवियर कॉलेज से बी.कॉम में स्नातक किया. 27 जनवरी 1973 को कमलनाथ अलका नाथ के साथ शादी के बंधन में बंधे. कमलनाथ के दो बेटे हैं. उनका बड़ा बेटा नकुलनाथ राजनीति में सक्रिय है.

Monday, December 10, 2018

जामिया के शाहजहां' मुशीरुल हसन नहीं रहे

जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के पूर्व कुलपति और जाने माने इतिहासकार पद्मश्री प्रोफ़ेसर मुशीरुल हसन का सोमवार सवेरे निधन हो गया. वो 71 साल के थे.

साल 2014 में हरियाणा के मेवात जाते वक़्त मुशीरुल हसन एक सड़क हादसे का शिकार हो गए थे जिसके बाद से वो बीमार चल रहे थे.

रविवार रात तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. सवेरे चार बजे उनका देहांत हो गया.

सोमवार शाम उन्हें जामिया विश्वविद्यालय के क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया. इस मौक़े पर पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी समेत विश्वविद्यालय के कई अधिकारी, अध्यापक और कई राजनयिक मौजूद थे.

उनके देहांत पर मौजूदा वर्किंग कुलपति शाहिद अशरफ़ ने कहा, "प्रो. हसन प्रेरेणादायक कुलपति थे और उन्होंने जेएमआई के ढांचागत विकास तथा शिक्षा के स्तर को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई."

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने उनकी मौत पर दुख प्रकट किया है. राहुल गांधी ने फ़ेसबुक पर लिखा "उनके जाने से अकादमिक दुनिया में तरह का ख़ालीपन आ गया है. वे हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे."

मुशीरुल हसन को भारत-पाकिस्तान विभाजन, सांप्रदायिकता और दक्षिण एशिया में इस्लाम पर उनके काम के लिए जाना जाता है. उन्हें जवाहरलाल नेहरू पर लिखी उनकी किताब 'द नेहेरूज़, पर्सनल हिस्ट्रीज़' के लिए भी जाना जाता है.

लेकिन लगभग दो दर्जन किताबें लिखने के अलावा उन्हें आर्किटेक्ट ऑफ़ मॉडर्न जामिया भी कहा जाता है.

वो 2004 से 2009 तक जामिया के वीसी थे. इस दौरान उन्हें जामिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर की यूनीवर्सिटी बना दिया. उन्हें कई नए कोर्सेज़ की शुरुआत की. कई महत्वपूर्ण बिल्डिंग बनवाई.

इसके अलावा उन्हें अपने विश्वविद्यालय की साख बचाने और छात्रों का साथ देने के लिए भी प्रो मुशीरुल हसन को जाना जाता है.

2008 में दिल्ली के जामियानगर बटला हाउस एनकाउंटर में दो कथित चरमपंथी और एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद कई संगठनों ने जामिया इलाक़े और जामिया यूनीवर्सिटी को निशाने पर लिया और इसे चरमपंथियों के छिपने का ठिकाना बताया.