Tuesday, March 19, 2019

मुकेश अंबानी ने भाई अनिल अंबानी को जेल जाने से बचाया

मुकेश अंबानी ने अपने भाई अनिल अंबानी को जेल जाने से बचा लिया है. रिलायंस कम्युनिकेशन्स के चेयरमैन अनिल अंबानी को एरिक्सन को तय समय सीमा के भीतर 7.7 करोड़ डॉलर का भुगतान करना था नहीं तो जेल जाना पड़ता.

इससे पहले अनिल अंबानी अदालत के आदेश के बावजूद बाकया का भुगतान नहीं कर पाए थे और इस बार कोर्ट की अवमानना में जेल जाने का ख़तरा मंडरा रहा था. हालांकि इस बार भाई मुकेश अंबानी ने बचा लिया.

इस बकाए को चुकाने में अपने बड़े भाई मुकेश और भाभी नीता अंबानी की मदद के लिए धन्यवाद करते हुए अनिल अंबानी ने एक बयान जारी किया है. इस बयान में लिखा है, ''मुश्किल घड़ी में मुझे अपने परिवार से मदद मिली है. यह हमारे परिवार के मज़बूत मूल्यों को ही दर्शाता है. जिस वक़्त मुझे सबसे ज़्यादा मदद की ज़रूरत थी मेरा परिवार साथ खड़ा हुआ.''

एक वक़्त था जब दोनों भाइयों के संबंध अच्छे नहीं थे और दोनों में प्रतिद्वंद्विता थी. अनिल अंबानी ने लिखा है, ''मैं और मेरा परिवार इस बात के लिए आभारी है कि हम अतीत से निकल गए हैं. इस मदद के लिए दिल से आभार प्रकट करता हूं.''

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने एरिक्सन के बकाए 7.7 करोड़ डॉलर चुकाने में लगातार हो रही देरी को लेकर अनिल अंबानी को कोर्ट की अवमानना का दोषी पाया था.

अनिल अंबानी ने पिछले साल ही निजी तौर पर वादा किया था कि साल के अंत तक वो एरिक्सन का क़र्ज़ चुका देंगे. सोमवार को स्वीडन के टेलिकॉम ग्रुप एरिक्सन ने कहा कि उसे रिलायंस कम्युनिकेशन्स से 6.7 अरब डॉलर की रक़म मिल गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि चार हफ़्ते के भीतर अगर एरिक्सन का पैसा नहीं मिलता है तो अनिल अंबानी और उनके दो सहयोगियों को तीन महीने के लिए जेल जाना होगा.

चार हफ़्ते की समय सीमा बुधवार को ख़त्म हो रही थी. भारत के हालिया कॉर्पोरेट इतिहास में अनिल अंबानी का बिखरना सबसे नाटकीय घटना रही है. 2008 में अनिल अंबानी रिलायंस कम्युनिकेशन्स के साथ दुनिया के सबसे आठवें अमीर व्यक्ति थे.

बाद में रिलायंस कम्युनिकेशन्स को बाज़ार में कड़ी प्रतिद्वंद्विता का सामना करना पड़ा. सबसे बड़ा झटका तो उनके भाई मुकेश अंबानी कंपनी जियो से लगा. एक साल के भीतर ही अनिल अंबानी पर क़र्ज़ सात अरब डॉलर का हो गया. अनिल अंबानी की और लिस्टेड कंपनियों में भी गिरावट आने लगी.

शुक्रवार को कोर्ट ने आरकॉम की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया था जिसमें बैंकों से 2.6 अरब रुपये के टैक्स रिफंड की मांग की गई थी. आरकॉम ने दलील दी थी कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद उन्हें फंड मिलने चाहिए.

पिछले दो सालों में आरकॉम ने ख़ुद को दिवालिया होने से बचाने काफ़ी कोशिश की लेकिन कोई मदद नहीं मिली.

अनिल अंबानी भारत के दूसरे उद्योगपति हैं जिन्हें अदालत की अवमानना में दोषी ठहराया गया है. इससे पहले सहारा ग्रुप के चेयरमैन सुब्रत रॉय को दोषी ठहराया गया था.

इसी महीने अनिल अंबानी ने आरकॉम के दिवालिया होने की घोषणा की थी. पिछले साल दिसंबर महीने तक अनिल अंबानी ने ख़ुद कोर्ट को आश्वस्त किया था कि वो एरिक्सन को पैसे दे देंगे.

अंबानी पैसे देने में नाकाम रहे तो एरिक्सन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल की और कहा कि आरकॉम ने कोर्ट की अवमानना की है इसलिए उन्हें गिरफ़्तार किया जाए.

इसी मामले में कोर्ट ने अनिल अंबानी और उनके दो निदेशकों सतीश सेठ और छाया विरानी को दोषी ठहाराया था.

हालांकि अदालत ने तत्काल गिरफ़्तारी की मांग को ख़ारिज कर दिया था लेकिन कोर्ट ने ये भी साफ़ कहा कि चार हफ़्ते के भीतर अंबानी पैसे नहीं देंगे तो तीन महीने की जेल होगी.

आरकॉम ने समय पर पैसे नहीं देने का तर्क दिया था कि इसके लिए सरकार ज़िम्मेदार है, क्योंकि सरकार ने जियो को संपत्ति बेचने की मंजूरी नहीं दी थी.

एरिक्सन ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया था और कहा है कि एक बार फिर से वो आरकॉम के वादों का इंतज़ार करेगी.

एक वक़्त था जब ये भारत की दूसरी बड़ी टेलिकम्युनिकेशन्स कंपनी थी. मगर अब इस कंपनी ने दिवालिया घोषित करवाने के लिए अर्जी दी देनी पड़ी.

अनिल अंबानी अपने जीवन के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं. मोदी सरकार के फ़्रांस से लड़ाकू विमान रफ़ाल के सौदे में भी अनिल अंबानी मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी के निशाने पर हैं. राहुल गांधी का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस सौदे में अनिल अंबानी को फ़ायदा पहुंचाया है.

Tuesday, March 12, 2019

英国脱欧关键时刻 盘点棘手重要议题

英国议会周二将就首相特蕾莎·梅与欧盟达成的脱欧协议再次投票。事关英国究竟是协议脱欧、无协议脱欧还是延迟脱欧,因此万众瞩目。

然而,如此重要投票的前一天,英国首相府周一(3月11日)表示,英国与欧盟的脱欧谈判仍然没有进展,继续陷于僵局。

英国广播公司BBC政治事务编辑萝拉·昆斯伯格(Laura Kuenssberg)分析认为,梅首相与欧盟达成的脱欧协议周二在议会获得通过的可能性“相当渺茫”。

如果议员通过脱欧协议,英国将在3月29日脱离欧盟,但是一切都将基本照常,要等到2020年12月英国与欧盟达成永久贸易协议之后才有实质变化。

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议会否决过脱欧协议吗?

今年1月否决过,而且是以压倒性多数票否决了梅首相的脱欧协议。

协议有何改动?

外界尚不知晓。英国政府正在努力说服欧盟对协议部分内容加以修改,希望那些在1月投否决票的议员改变立场支持协议。

如果议会再次否决怎么办?

如果议会周二再次如普遍预期那样否决脱欧协议,那么议会很有可能将在周三(3月13日)投票表决:英国要不要无协议脱欧。

如果议会同意无协议脱欧,那么英国将在与欧盟没有协议的局面下,于3月29日脱离欧洲。

如果议会不同意无协议脱欧,那么将在周四(3月14日)继续表决:是否要求欧盟推迟脱欧时间。

脱欧之前是否还有最后投票?

不一定。

如果反对梅首相脱欧协议的议员人数较少,那么她可以要求欧盟从技术层面暂缓议程,以便争取时间重新游说,再努力一次让协议在议会“获得通过”。

欧盟将在3月22日召开峰会,梅首相可以在此时最后一搏。

梅首相脱欧协议包括了什么?

首先,这一协议并不包括英国与欧盟的贸易关系。

这一协议只是让英国有序离开欧盟,将其对英国和欧盟的个人以及公司的影响最小化。

在正式脱欧日期3月29日之后,一切应该都会继续照常进行至少21个月。

在这21个月当中,双方将努力就永久贸易关系达成协议。

协议还承诺英国将向欧盟支付390亿英镑的“分手费”。在欧盟的英国公民,在英国的欧盟公民,都将继续保持他们的居住权和社保福利。

对个人的影响?

周二,英国议会的投票表决将为未来的英国经济和社会定型,影响到英国人的收入、就业前景和其他。另外,还可能有一些直接的后果。

很多人担心,无协议脱欧将在港口造成混乱,影响食品和药品供应,造成长远的经济损失,很多大型跨国公司撤出英国。

还有人认为,这些担心都被夸大了,英国彻底脱离欧盟后一定会更加繁荣昌盛。

脱欧协议最大争议点?

英国脱欧协议中最富争议的内容是爱尔兰的边界问题。

英国北爱和爱尔兰之间有约500公里的边界线,这也是英国与欧盟之间唯一的陆地边界。这段边界究竟是否该重新设立边检呢?

在爱尔兰边界保障协议(backstop)问题上,欧盟与英国之间以及英国内部一直都无法达成共识。

边界保障协议?

爱尔兰边界保障协议,将让英国继续遵守欧盟的海关规定,避免在边界重新设立边检站检查来往的车辆。很多人担心,一旦重新开始边检,北爱曾经的政治麻烦将再次困扰英国。

这一边界保障协议,只有在英国与欧盟之间未能在2020年12月达成贸易协议的情况下才会启动,而且是临时性的协议。

但是,因为协议上没有明确注明届满日期,也因为没有欧盟的同意英国不能退出协议,所以很多英国议员担心这一临时协议将会成为永久协议,使脱欧空有名而没有实,变成笑话一场。

Wednesday, March 6, 2019

क्या F-16 विमानों का इस्तेमाल भारत के ख़िलाफ़ कर सकता है पाकिस्तान?

बीते कुछ दिनों से भारत से लेकर पाकिस्तानी मीडिया में एक सवाल उठाया जा रहा है कि पाकिस्तान ने भारत के ख़िलाफ़ हवाई हमले में एफ़-16 विमानों का इस्तेमाल किया है या नहीं.

पाकिस्तान सरकार का दावा है कि वह ऐसे अभियानों में एफ़-16 विमानों का इस्तेमाल नहीं करता है. वहीं, भारत सरकार ने कुछ सबूत दिखाकर ये दावा किया है कि भारतीय वायुसेना ने एक एफ़-16 विमान को मार गिराया है.

इस बीच ये ख़बर भी आई कि अमरीकी सरकार ने इन विमानों को भारत के ख़िलाफ़ इस्तेमाल को लेकर पाकिस्तान को खरीखोटी सुनाई है. हालांकि, अब तक इन ख़बरों की पुष्टि नहीं की जा सकी है.

लेकिन पाकिस्तान में स्थित अमरीकी दूतावास के प्रवक्ता ने बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में बताया है कि अमरीकी सरकार इस मुद्दे पर जानकारी हासिल कर रही है कि क्या पाक वायुसेना ने भारत के ख़िलाफ़ एफ़-16 विमान का प्रयोग किया जिसकी वजह से भारतीय वायुसेना का मिग-21 विमान मारा गया.

अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा है कि अमरीका ऐसी ख़बरों से अवगत है और अधिक जानकारी आने का इंतज़ार कर रहा है.

हालांकि, अब तक ये स्पष्ट नहीं है कि अमरीकी सरकार ने इसके लिए आधिकारिक तौर पर पाक सरकार से संपर्क किया है या नहीं.

पाकिस्तान क्या कर सकता है?

एफ़-16 विमानों के इस्तेमाल को लेकर अभी भी एक सवाल बना हुआ है कि क्या अमरीका और पाकिस्तान के बीच विमानों के इस्तेमाल को लेकर कोई ऐसा क़रार है जिसके तहत पाकिस्तान आक्रामक अभियानों में इन विमानों का प्रयोग नहीं कर सकता है.

पाकिस्तान के सूचना मंत्री फ़व्वाद चौधरी ने कहा है कि इस मुद्दे पर अब तक अमरीकी सरकार ने संपर्क नहीं किया है.

वहीं, पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल ग़फ़ूर से जब ये सवाल किया गया कि क्या पाकिस्तान ने एफ़-16 विमानों का प्रयोग किया तो उन्होंने भी इसे लेकर असहमति जताई.

हालांकि, पाकिस्तान के पूर्व रक्षा सचिव लेफ़्टिनेंट जनरल नईम लोधी ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा है कि उनकी जानकारी में पाकिस्तान और अमरीका के बीच ऐसा कोई क़रार नहीं है जो हथियारों के इस्तेमाल को सीमित करता हो.

लोधी बताते हैं, "पहली बात तो ये कि जब सारी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान का नंबर 1 दुश्मन भारत है. इसके बावजूद वे रक्षा उत्पाद बेचते हैं तो ये उम्मीद करना बहुत ही स्वाभाविक है कि इनका इस्तेमाल कहां होगा. दूसरी बात ये है कि पाकिस्तान ने ये हथियार फ्री में नहीं ख़रीदे हैं. मेरे मुताबिक़, ऐसा कोई क़रार नहीं है जो कि ये तय करता हो कि ये विमान सिर्फ़ आतंक के ख़िलाफ़ संघर्ष में इस्तेमाल किए जा सकते हैं"

हालांकि, लोधी हेलिकॉप्टर डील पर बात करते हुए कहते हैं कि लड़ाकु जहाज़ों को लेकर ऐसे किसी क़रार की जानकारी उन्हें नहीं है. हालांकि, कुछ हेलिकॉप्टरों को सिविल इस्तेमाल के लिए रखा गया है.

हमला हुआ तो क्या करेगा पाकिस्तान?
वहीं, पाकिस्तान के पूर्व रक्षा मंत्री खु़र्रम दस्तगीर कहते हैं कि पाकिस्तान अपनी रक्षा के लिए और अपनी सीमा पर हर तरह के हथियार का इस्तेमाल कर सकता है. लेकिन पाकिस्तान इस विमान को किसी देश के ख़िलाफ़ आक्रामक कार्रवाई के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता है.

इसके साथ ही पाकिस्तान के पूर्व रक्षा सचिव नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं, "ये संभव है कि नाइन इलेवन के बाद ख़रीदे गए एफ़-16 विमानों के साथ ही ऐसी कोई शर्त जुड़ी हो. लेकिन ये समझना ज़रूरी है कि पाकिस्तान पर हमले की स्थिति में पाकिस्तान किसी डील के बारे में सोचने की जगह अपनी रक्षा करने के लिए बेहतरीन हथियारों का इस्तेमाल करने की सोचेगा.

पाकिस्तान ने अपनी सुरक्षा के लिए बीते कुछ सालों में भारी मात्रा में हथियार और विमान ख़रीदे हैं.

और पाकिस्तान सरकार आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई ही नहीं बल्कि अपनी पूर्वी सीमा की सुरक्षा के लिए भी इन विमानों पर निर्भर है.