Wednesday, November 21, 2018

इस आदमी से सीखिए पैसा बचाने और प्रॉपर्टी बनाने के नुस्खे

25 साल के क्रेग क्योरलोप रिटायरमेंट की तैयारियों में लगे हैं. बहुत थोड़े में गुजारा करने के जिस दर्शन पर वह चल रहे हैं, उसमें उनका रिटायरमेंट ज्यादा दूर नहीं लगता.

उनको उम्मीद है कि 28 साल का होते-होते वे रिटायर होने लायक बन जाएंगे.

क्योरलोप अमरीका के कोलोराडो के डेनवर में रहते हैं. वह लोकप्रिय हो रहे फ़ायर (FIRE) आंदोलन के सदस्य हैं. फ़ायर (FIRE- Financial Independence, Retire Early) का लक्ष्य है वित्तीय आज़ादी, जल्दी सेवानिवृत्ति.

इस आंदोलन के समर्थक कंजूसी की ज़िंदगी जीकर ज्यादा से ज्यादा पैसे बचाने की कोशिश करते हैं ताकि जल्दी रिटायर होने के काबिल बन सकें.

क्योरलोप ने अपने लिए 28 साल की उम्र में रिटायर होने का लक्ष्य तय किया है.

अपने पास सब कुछ हो लेकिन इस्तेमाल किसी चीज का न करें- यह दर्शन क्योरलोप की ज़िंदगी के हर कोने में दिखता है.

क्या म्यूचुअल फंड्स अब नहीं रहे फ़ायदे का सौदा?
अच्छा काम करने पर भी क्या आपका बॉस दादागीरी करता है, ये रही वजह
आमदनी बढ़ाओ
बचत बढ़ाने के लिए वह इस हद तक चले गए हैं कि अपना बेडरूम भी किराये पर चढ़ा दिया है और पिछले एक साल से लिविंग रूम में सो रहे हैं.

क्योरलोप पेशे में वित्तीय विश्लेषक हैं. उनको लगता है कि जिस रणनीति से वह बचत कर रहे हैं, वह 28 का होते-होते उनको इतना सक्षम बना देगा कि वे अपनी तनख़्वाह वाली नौकरी को छोड़ सकें.

बचत की शुरुआत उन्होंने रोज साइकिल से दफ़्तर जाने से की और अपनी कार किराये पर चढ़ा दी.

वह कहते हैं, "मैं कार से हर महीने 400 डॉलर से 700 डॉलर कमा लेता था. आना-जाना लोगों के लिए दूसरा सबसे बड़ा खर्च है."

क्रेग क्योरलोप की रणनीति बड़ी साफ है. "कोई संपत्ति तभी संपत्ति है जब आप उससे पैसे कमा सकें."

वह मिसाल भी देते हैं, "आप कोई घर खरीदें और उसे किराये पर चढ़ा दें. यदि किराये से होने वाली आमदनी कर्ज के ब्याज से ज्यादा है तो हर महीने 100 डॉलर, 200 डॉलर या हो सकता है कि 1000 डॉलर आपकी जेब में आने लगें."

Tuesday, November 6, 2018

लखनऊ में 24 साल बाद अंतरराष्ट्रीय मैच

भारत-वेस्टइंडीज के बीच तीन टी-20 मैचों की सीरीज का दूसरा मुकाबला आज लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी स्टेडियम में खेला जाएगा। इस स्टेडियम का नाम पहले इकाना था, लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मैच से 24 घंटे पहले इसे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित कर दिया। यह लखनऊ का तीसरा स्टेडियम है, लेकिन इस मैदान पर पहली बार कोई अंतरराष्ट्रीय मैच खेला जाएगा। भारतीय टीम सीरीज में 1-0 से आगे है। भारत ने कोलकाता में खेले गए पहले मैच में विंडीज को पांच विकेट से हराया था।

पिछली बार लखनऊ में 1994 में भारत-श्रीलंका के बीच टेस्ट केडी सिंह बाबू स्टेडियम में खेला गया था। अटल स्टेडियम भारत का 51वां अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम होगा। वहीं, टी-20 आयोजित करने वाला यह 21वां स्टेडियम बनेगा। काली मिट्टी से बनाए गए छह नम्बर की पिच पर भारत-विंडीज मुकाबला खेला जाएगा। पिच क्यूरेटर के अनुसार, गेंद धीमी गति से बल्ले पर आएगी, जिससे मुकाबला लो स्कोरिंग हो सकता है।

अपने राज्य में पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेलेंगे कुलदीप
विंडीज के खिलाफ पहले मैच में तीन विकेट लेने वाले चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव का अपने राज्य में यह पहला अंतरराष्ट्रीय मैच होगा। उन पर घरेलू दर्शकों की उम्मीदों का भी दबाव होगा। पिच को लेकर लगाए जा रहे कयास से कुलदीप को खुशी मिली होगी। गेंद जितनी धीमी बल्ले पर जाएगी, कुलदीप को उतना ही फायदा होगा। वे आमतौर पर गेंद को धीमी गति से ही डालते हैं।

खलील-क्रुणाल से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
नियमित कप्तान विराट कोहली और विकेटकीपर महेन्द्र सिंह धोनी की गैरमौजूदगी में भी टीम इंडिया ने कोलकाता में बेहतर प्रदर्शन किया। डेब्यू करने वाले खलील अहमद ने 16 रन पर एक विकेट और ऑलराउंडर क्रुणाल पांड्या ने एक विकेट लेने के साथ-साथ केवल नौ गेंदों में 21 रन बनाए थे। कप्तान रोहित शर्मा दोनों से इस मुकाबले में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे होंगे।

शिखर धवन का खराब फॉर्म बरकरार
वनडे सीरीज के पांच मैच में केवल 112 रन बनाने वाले शिखर धवन का प्रदर्शन पहले टी-20 में भी खास नहीं रहा। वे आठ गेंद में तीन रन बनाकर बोल्ड हो गए थे। आज के मैच में अगर उन्हें मौका मिलता है तो वे अपने नेचुरल खेल का प्रदर्शन करना चाहेंगे। इससे उनकी खोई हुई फार्म भी वापस आएगी और टीम में स्थान भी पक्का रहेगा।

होप-हेटमेयर और पोलार्ड से विंडीज को उम्मीदें
दूसरी ओर, विंडीज को इस समय ऑलराउंडर आंद्रे रसेल की कमी खल रही है। छोटे फार्मेट में गेंद और बल्ले से विपक्षी टीम को दवाब में लाने वाले रसेल घुटने की चोट के चलते नहीं खेल रहे हैं। ऐसे में उनके बिना भी वेस्टइंडीज वापसी की कोशिश करेगा। कप्तान कार्लोस ब्राथवैट को बल्लेबाजी में शाई होप और शिमरॉन हेटमेयर से अधिक उम्मीदें होंगी। दोनों ने वनडे सीरीज में शतक लगाए थे। वहीं, अनुभवी कीरोन पोलार्ड से टीम मैनेजमेंट बेहतर प्रदर्शन चाहेगा।

सेना छोड़कर हिजबुल में शामिल हुआ युवक भी मारा गया

दक्षिण कश्मीर के शोपियां में मंगलवार को सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया। सेना और पुलिस को इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की जानकारी मिली थी। इसके बाद मंगलवार तड़के सफानगरी इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया गया। इस दौरान आतंकियों ने जवानों पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। पुलिस के मुताबिक, मारे गए आतंकियों में से एक अप्रैल में सेना छोड़कर हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था।

कई हमलों में शामिल रहे थे दोनों आतंकी
आतंकियों की पहचान मोहम्मद इदरीस सुल्तान उर्फ छोटा अबरार और आमिर हुसैन (दोनों शोपियां निवासी) के तौर पर हुई। 20 साल की इदरीस पहले सेना का जवान था। दोनों आतंकी घाटी में सेना और आम जनता पर हुए कई हमलों में शामिल रहे थे।

पुलिस के मुताबिक, इदरीस और आमिर आतंकी संगठन हिजबुल से जुड़े थे। ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों को कोई क्षति नहीं हुई। मुठभेड़ के बाद मौके से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया गया।

शोपियां में और आतंकी छिपे होने की सूचना
एक अफसर ने बताया कि शोपियां में और आतंकियों छिपे होने का शक है। पुलिस और सुरक्षाबलों के जवान सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। लोगों को मुठभेड़ वाली जगहों के पास न जाने की हिदायत दी है। क्योंकि यहां विस्फोट का खतरा रहता है। पिछले दिनों मुठभेड़ के बाद धमाके में 6 आम नागरिकों की जान चली गई थी।

भाजपा की सोमवार को आई विधानसभा के 17 प्रत्याशियों की दूसरी लिस्ट में भी इंदौर को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटों की दावेदारी के चक्कर में इंदौर का गणित गड़बड़ा गया है। इनमें इंदौर की क्षेत्र क्रमांक एक से पांच, महू, राऊ, देपालपुर और सांवेर की सीट शामिल है। इसके साथ भोपाल की गोविंदपुरा व उत्तर सीट पर भी पेंच फंसा हुआ है।

इन सभी सीटों में चल रही खींचतान को देखते हुए पार्टी ने तय किया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से चर्चा के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। इंदौर में महाजन अपने बेटे मंदार और विजयवर्गीय अपने बेटे आकाश के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। रविवार को सीएम हाउस में हुई बैठक में भाेपाल की गोविंदपुरा व उत्तर सीट तथा इंदौर की सीटों को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बाद तय हुआ कि शाह और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल से एक बार और बात की जाए।

सुबह सुर बदले, दोपहर में गौर-कृष्णा ने खरीदा पर्चा: भोपाल की गोविंदपुरा से भाजपा की टिकट को लेकर चल रहा ड्रामा सोमवार को भी जारी रहा। नाराज चल रहे बाबूलाल गौर और उनकी बहू कृष्णा गौर के तेवर सुबह तो नरम दिखे, लेकिन दोपहर में दोनों ने नामांकन फॉर्म खरीद कर सरगर्मी फिर बढ़ा दी। बाबूलाल और कृष्णा एक दिन पहले तक निर्दलीय लड़ने की धमकी दे रहे थे। सोमवार सुबह होते-होते दोनों के सुर बदल गए। गौर ने कहा कि उन्होंने अपने मन की बात सुनकर यह निर्णय लिया है कि पार्टी टिकट देगी तो ही चुनाव लड़ेंगे, वर्ना राम नाम जपेंगे। कृष्णा गौर ने कहा कि पार्टी जो भी निर्णय लेगी, उसी हिसाब से काम करेंगी। दरअसल, रविवार रात नरेंद्र सिंह तोमर ने उन्हें काफी देर तक समझाइश दी थी।

Monday, November 5, 2018

'मुग़ले आज़म' में पृथ्वी राज कपूर ने कितने पैसे लिए थे?

बॉलीवुड के मुग़ल-ए-आज़म पृथ्वीराज कपूर का जन्म 3 नवंबर, 1906 को मौजूदा पाकिस्तान के लायलपुर की तहसील समुंद्री में हुआ था.

वह तीन साल के थे जब मां का निधन हो गया, आठ साल की उम्र में उन्होंने पहली बार स्कूली नाटक में हिस्सा लिया.

एडवर्ड कॉलेज, पेशावर से बैचलर की डिग्री लेने तक नाटकों से लगाव बढ़ गया. रंगमंच प्रेम के चलते लाहौर आए लेकिन किसी नाटक मंडली में काम नहीं मिला. वजह बेहद दिलचस्प थी- वे पढ़े लिखे थे.

सितंबर, 1929 को काम की तलाश में बंबई आ गए और इंपीरियल फ़िल्म कंपनी में बिना वेतन के एक्स्ट्रा कलाकार बन गए. लेकिन उन्हें बॉलीवुड का शहंशाह बनना था.

भारत की पहली बोलती फ़िल्म आलमआरा में 1931 में 24 साल की उम्र में अलग-अलग आठ दाढ़ियां लगाकर जवानी से बुढ़ापे तक की भूमिका निभाकर अपने अभिनय की लाजवाब मिसाल पेश की.

जब फ़िल्मी पर्दे पर गरजे अक़बर

दस साल बाद 1941 में, सोहराब मोदी के 'सिकंदर' फ़िल्म में सिकंदर की बेमिसाल भूमिका उन्होंने निभाई.

जहाँ 'आवारा के पिता' कहने पर ग़ुस्सा गए थे पृथ्वीराज कपूर

1960 में मुगले आज़म में अक़बर के क़िरदार के साथ उन्होंने अभिनय का ऐसा शाहकार रचा जिसकी आज भी मिसाल दी जाती है.

इस फ़िल्म की स्टार कास्ट में पृथ्वीराज कपूर का नाम दिलीप कुमार और मधुबाला से पहले आता है. इसको लेकर दिलीप कुमार और मधुबाला में एक तरह से नाराज़गी भी थी.

इस नाराज़गी का जिक्र पृथ्वी थिएटर में काम करने वाले योगराज टंडन ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्रकाशित 'थिएटर के सरताज पृथ्वीराज' में किया है.

मुगले आजम बनने में काफ़ी विलंब हो रहा था, कई वजहें थी, जिसकी चर्चा होती रहती थी. एक वजह ये भी थी कि फ़िल्म में स्टारकास्ट में पृथ्वीराज का नाम पहले आने वाला था.

इस बारे में पृथ्वीराज ने के आसिफ़ को कहा, "क्यों छोटे मोटे झगड़ों में फंसकर फ़िल्म लटका रहे हो. मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, इन दोनों के नाम मुझसे पहले और बड़े अक्षरों में लिख दो."

आसिफ़ ने कहा था, "दीवानजी, मैं मुगले आज़म बना रहा हूं, सलीम-अनारकली नहीं. यह बात इन दोनों में से किसी को समझ नहीं आती. मेरी इस फ़िल्म का केवल एक हीरो है और वो है अक़बर दी ग्रेट."

ब्लैंक चेक में लिखा 1 रुपया
वैसे इस फ़िल्म में पृथ्वीराज के जुड़ने से जुड़ा भी बेहद दिलचस्प क़िस्सा है. के. आसिफ़ ने उन्हें अनुबंध के तौर पर लिफाफे में चेक दिया था. जो कोरा था.

इसका जिक्र योगराज टंडन ने लिखा है. उन्होंने लिखा है, "जहां इतना कुछ लिखा है, वहां रक़म भी लिख देते- पृथ्वीराज कपूर ने मज़ा लेते हुए चुटकी ली.

आसिफ़ जी बोले- पहले तो यह बताइए इसमे कुल रक़म कितनी लिखूं."

योगराज टंडन ने लिखा है कि पृथ्वीराज कपूर के सहायक के तौर पर इस बातचीत के दौरान वहां मौजूद थे.

पृथ्वीराज जी ने कहा, "क्या तुम नहीं जानते."

के. आसिफ़ ने कहा, "जानता तो पूछता नहीं."