एक तरफ पश्चिम में प्राचीन सभ्यता का जब अंत हो रहा था तो दूसरी ओर पूरब में गणित अपनी नई ऊंचाइयां छू रहा था.
समुद्री रास्ते का पता करना हो या दिन का समय निकालना हो, गणित इन सब में अपना अहम किरदार निभाता और यही कारण है कि प्राचीन सभ्यता बहुत हद तक इस पर निर्भर थी.
गणित की यात्रा मिस्र, मेसोपोटामिया और ग्रीस से शुरू हुई लेकिन इन सभ्यताओं के पतन के बाद पश्चिम में इसकी प्रगति रुक गई.
हालांकि, पूरब में इसकी यात्रा एक नई ऊंचाई पर पहुंच गई थी.
प्राचीन चीन में, गणित बेहद महत्वपूर्ण विषय था. इसकी मदद से ही हज़ारों मीलों तक फैली 'ग्रेट वॉल ऑफ़ चाइन' खड़ी हुई.
उस दौरान कैलेंडर और ग्रहों की चाल पर सम्राट अपने सभी निर्णय लेते, यहां तक कि उनके दिन और रात की योजनाएं भी इसी के आधार पर बनाई जाती थीं.
शाही मंत्री यहां तक सुनिश्चित करते कि सम्राट बड़ी संख्या में मौजूद अपने हरम की सभी महिलाओं के साथ एक निश्चित अवधि के अंतराल पर रात बिताएं.
यह गणित के ज्यामितीय अनुक्रम या गुणोत्तर श्रेणी पर आधारित होता था. कहा जाता है कि चीन के सम्राट को 15 दिनों के दौरान 121 महिलाओं के साथ सोना पड़ता था.
महारानी से लेकर दास-दासियों पांच समूह अपने पिछले समूह से तीन गुना बड़ा था. गणितज्ञों को यह सुनिश्चित करना था कि सम्राट इनमें से प्रत्येक के साथ एक निश्चित अवधि के दरम्यान सो सकें. लिहाजा उन्होंने रोस्टर बनाया ताकि हरम की प्रत्येक महिलाओं को 15 दिनों के बाद सम्राट के साथ सोने का मौका मिल सके.
पहली रात महारानी के लिए रखा जाता तो दूसरी रात तीन वरिष्ठ पत्नियों के लिए और इसके बाद नौ पत्नियों का नंबर आता.
फिर नौ की संख्या में बारी-बारी से 27 हरमदासियों का. इस तरह से छह रातें बीततीं.
इसके बाद नंबर आता नौ-नौ की संख्या में 81 दासियों का. और इस तरह से 15 दिनों में सभी 121 महिलाओं के साथ सम्राट रात गुजारते.
रोस्टर यह भी तय करता था कि पूर्णिमा के आसपास के दिनों में सम्राट सर्वोच्च दर्जे की महिला के साथ सो सकें.
प्राचीन अवधारणा के मुताबिक ऐसे समय में महिलाओं का 'यिन', यानी उनकी जनन क्षमता अपने चरम पर होती है और मान्यता थी कि इस दौरान महिलाएं 'यांग', यानी पौरुष बल का सामना करने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में होती थीं.
सम्राट तो शासक थे, लिहाजा उनमें शारीरिक दमखम का होना तो लाजमी था. लेकिन यह भी स्पष्ट था कि दमखम की ज़रूरत सबसे अच्छा शाही उत्तराधिकारी पाने के लिए भी उतना ही ज़रूरी है.
गणित दरबार को चलाने के लिए ही इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था बल्कि राज्य को चलाने में भी अपना अहम किरदार निभा रहा था.
प्राचीन चीन सख्त क़ानून, व्यापक टैक्स व्यवस्था, वजन और मुद्रा की एक प्रामाणिक व्यवस्था के साथ एक विशाल और बढ़ता साम्राज्य था.
वहां पश्चिम में दशमलव प्रणाली के अपनाये जाने से 1,000 साल पहले से इस्तेमाल किया जा रहा था. इतना ही नहीं 19वीं सदी की शुरुआत में जो गणितीय समीकरण पश्चिम में दिखने शुरू हुए थे, चीन सदियों से इनके इस्तेमाल कर रहा था.
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, चीन में देवता माने जाने वाले येलो सम्राट ने यह मानते हुए कि संख्याओं का आलौकिक महत्व है, 2800 ईसा पूर्व में गणित की रचना की थी.
प्राचीन चीन में आकृतियां भी नंबरों के इस्तेमाल से बनाई जाती थीं, उन्होंने सुडोकू के शुरुआती संस्करण को भी विकसित किया था.
छठी शताब्दी के चीन में खगोल विज्ञान के जरिए ग्रहों की गति की गणना करने में थ्योरम (प्रमेय) का इस्तेमाल किया जा रहा था.
Tuesday, February 26, 2019
Wednesday, February 20, 2019
भारत आए सऊदी प्रिंस को एयरपोर्ट लेने पहुंचे मोदी
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंच गए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट पहुंचकर उनका स्वागत किया है.
प्रिंस सलमान इस दौरे से ठीक पहले दो दिन के पाकिस्तान दौरे पर भी गए थे.
पुलवामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव का असर प्रिंस सलमान के इस पहले द्विपक्षीय भारत दौरे पर भी पड़ सकता है.
क्राउन प्रिंस दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत को अपना तेल अधिक मात्रा में बेचना चाहते हैं.
बुधवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रिंस सलमान के बीच वार्ता होगी तो उसमें पुलवामा हमले पर भी विस्तृत चर्चा हो सकती है.
सोमवार को इस्लामाबाद में सऊदी विदेश मंत्री आदेल अल ज़ुबैर ने कहा था, "हमारा मक़सद दोनों देशों, पड़ोसी देशों के बीच तनाव को कम करना है और ये देखना है कि क्या शांति से मतभेद ख़त्म करने का कोई रास्ता हो सकता है."
पुलवामा हमले से पहले सऊदी राजकुमार की यात्रा का मुख्य एजेंडा भारत को तेल की बिक्री और आर्थिक निवेश ही था.
लेकिन अब बदले माहौल में राजनीतिक चर्चाएं भी होंगी.
भारत इस समय अपने कुल तेल आयात का बीस प्रतिशत सऊदी अरब से करता है.
भारत सबसे ज़्यादा तेल ईरान से ख़रीदता है. सऊदी अरब चाहता है कि वो अपने चिर प्रतिद्वंदी ईरान को इस मामले में पीछे छोड़ दे.
इससे पहले जब सऊदी प्रिंस रविवार को पाकिस्तान पहुंचे थे तो वहां उनका ज़ोरदार स्वागत हुआ था.
पाकिस्तान की वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने उन्हें हवा में सलामी दी थी और प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ख़ुद कार चलाकर उन्हें एयरपोर्ट से अपने घर तक लेकर गए थे.
सऊदी प्रिंस ने पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को बेहद क़रीबी बताते हुए कहा था कि सऊदी अरब भविष्य में भी पाकिस्तान का मज़बूत सहयोगी बना रहना चाहेगा.
उन्होंने पाकिस्तान के साथ बीस अरब डॉलर के निवेश समझौते भी किए थे. इसे अभूतपूर्व आर्थिक निवेश माना जा रहा है.
यही नहीं प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की गुज़ारिश पर उन्होंने सऊदी जेलों में बंद पाकिस्तानी नागरिकों को रिहा करने का आदेश भी दिया.
अब जब वो भारत आएं हैं तो भारत और पाकिस्तान के रिश्तों के तनाव का असर उनकी इस व्यापारिक यात्रा पर हो सकता है.
सऊदी अरब के लिए दोनों ही देशों से रिश्ते अहम हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बुधवार को होने वाली वार्ता के बाद आने वाले साझा बयान पर सभी की नज़रें बनी हुई हैं.
भारत पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अलग-थलग करने की कोशिशों में जुटा हुआ है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट पहुंचकर उनका स्वागत किया है.
प्रिंस सलमान इस दौरे से ठीक पहले दो दिन के पाकिस्तान दौरे पर भी गए थे.
पुलवामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव का असर प्रिंस सलमान के इस पहले द्विपक्षीय भारत दौरे पर भी पड़ सकता है.
क्राउन प्रिंस दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत को अपना तेल अधिक मात्रा में बेचना चाहते हैं.
बुधवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रिंस सलमान के बीच वार्ता होगी तो उसमें पुलवामा हमले पर भी विस्तृत चर्चा हो सकती है.
सोमवार को इस्लामाबाद में सऊदी विदेश मंत्री आदेल अल ज़ुबैर ने कहा था, "हमारा मक़सद दोनों देशों, पड़ोसी देशों के बीच तनाव को कम करना है और ये देखना है कि क्या शांति से मतभेद ख़त्म करने का कोई रास्ता हो सकता है."
पुलवामा हमले से पहले सऊदी राजकुमार की यात्रा का मुख्य एजेंडा भारत को तेल की बिक्री और आर्थिक निवेश ही था.
लेकिन अब बदले माहौल में राजनीतिक चर्चाएं भी होंगी.
भारत इस समय अपने कुल तेल आयात का बीस प्रतिशत सऊदी अरब से करता है.
भारत सबसे ज़्यादा तेल ईरान से ख़रीदता है. सऊदी अरब चाहता है कि वो अपने चिर प्रतिद्वंदी ईरान को इस मामले में पीछे छोड़ दे.
इससे पहले जब सऊदी प्रिंस रविवार को पाकिस्तान पहुंचे थे तो वहां उनका ज़ोरदार स्वागत हुआ था.
पाकिस्तान की वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने उन्हें हवा में सलामी दी थी और प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ख़ुद कार चलाकर उन्हें एयरपोर्ट से अपने घर तक लेकर गए थे.
सऊदी प्रिंस ने पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को बेहद क़रीबी बताते हुए कहा था कि सऊदी अरब भविष्य में भी पाकिस्तान का मज़बूत सहयोगी बना रहना चाहेगा.
उन्होंने पाकिस्तान के साथ बीस अरब डॉलर के निवेश समझौते भी किए थे. इसे अभूतपूर्व आर्थिक निवेश माना जा रहा है.
यही नहीं प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की गुज़ारिश पर उन्होंने सऊदी जेलों में बंद पाकिस्तानी नागरिकों को रिहा करने का आदेश भी दिया.
अब जब वो भारत आएं हैं तो भारत और पाकिस्तान के रिश्तों के तनाव का असर उनकी इस व्यापारिक यात्रा पर हो सकता है.
सऊदी अरब के लिए दोनों ही देशों से रिश्ते अहम हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बुधवार को होने वाली वार्ता के बाद आने वाले साझा बयान पर सभी की नज़रें बनी हुई हैं.
भारत पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अलग-थलग करने की कोशिशों में जुटा हुआ है.
Wednesday, February 13, 2019
राज्यपाल किरण बेदी के खिलाफ सरकार का धरना, मुख्यमंत्री ने राजभवन के बाहर गुजारी रात
पुड्डुचेरी में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच राज्य के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी पिछले दो दिनों से राज्यपाल किरण बेदी के घर के बाहर धरना दे रहे हैं। बुधवार को उन्होंने राजभवन के बाहर दरी पर सोकर रात बिताई। कैबिनेट के कुछ मंत्री भी उनके साथ थे। पुड्डुचेरी की कांग्रेस सरकार का आरोप है कि बेदी लोककल्याण की कई योजनाओं को लागू नहीं होने दे रहीं। इसी को लेकर नारायणसामी बुधवार सुबह से धरने पर हैं।
‘प्रधानमंत्री के कहने पर रोड़े अटका रहीं राज्यपाल’
धरने में कांग्रेस को द्रमुक का भी साथ मिला है। नारायणसामी का आरोप है कि राज्यपाल सरकार के रोज के कामकाज में भी दखल दे रही हैं। मुख्यमंत्री ने न्यूज एजेंसी से कहा कि बेदी के पास अपनी कोई पावर नहीं है। वे सिर्फ मंत्रियों द्वारा भेजे गए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए हैं। उन्हें कैबिनेट के फैसलों को रोकने का अधिकार नहीं है, लेकिन वे हमारे निर्णयों को वीटो कर रही हैं। खुद प्रधानमंत्री उन्हें हमारी सरकार के कामों में रोड़े अटकाने के लिए कह रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
दो दिन पहले बेदी ने कहा था कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाना चाहिए। वहीं, सरकार का कहना था कि वह पहले जागरुकता फैलाएगी फिर इसे अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच विवाद पैदा हो गया।
बेदी ने किया ट्वीट
बेदी ने बुधवार शाम नारायणसामी को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को धरने पर बैठने से पहले मुझसे मुलाकात करनी चाहिए थी। आप पहले एक पत्र लिखते और मेरे जवाब का इंतजार करते। बेदी ने 21 फरवरी को मुख्यमंत्री को बातचीत के लिए बुलाया है।
यह रैप आर्टिस्ट्स नैजी और डिवाइन की जिंदगी से प्रेरित सच्ची कहानी है जो धारावी की तंग गलियों से निकलकर रैपर बनने के सपने को साकार कर जाते हैं। फिल्म की शुरुआत में दिखाया जाता है कि मुराद अपने डॉमिनेटिंग और रुढ़िवादी पिता (विजय राज) और बीमार मां (अमृता सुभाष) के साथ गरीबी की जिंदगी बिता रहा है। मां और पिता हमेशा झगड़ते रहते हैं और जिंदगी तंगहाली में ही गुजर रही है जिससे मुराद खुश नहीं है।
वह अपने पिता के बताए रास्ते की बजाए कुछ अलग करना चाहता है और रैपर बनना चाहता है। इस अर्थ हीन जिंदगी में उसके लिए केवल एक ही सुकून भरी चीज है और वह है उसके बचपन का प्यार सैफीना (आलिया भट्ट)। सैफीना सर्जन बनने की पढ़ाई कर रही है। वह भी एक रुढ़िवादी परिवार से है जिसे आम लड़कियों की तरह घूमने-फिरने की आजादी नहीं है लेकिन इसके बावजूद वह मुराद के साथ कुछ सुकून भरे पल बिताने के मौके ढूंढ लेती है।
मुराद की जिंदगी में तब बदलाव आने शुरू होते हैं जब उसकी मुलाकात एमसी शेर (सिद्धांत चतुर्वेदी) से होती है। एमसी मुराद के अंदर छुपे टैलेंट को पहचान लेता है और उसके अंदर रैपर बनने के सपने को हकीकत में बदलने का जोश भरता है।
सैफीना और मुराद की स्ट्रगलिंग लाइफ के साथ जोया ने बेहतरीन कहानी चुनी है जिसका हर सीन इतना बेहतरीन है कि आप आसानी से फिल्म का हिस्सा बनते चले जाते हैं और उसे अपने अंदर महसूस करने लग जाते हैं। मुराद की हार में आपको अपनी हार और फिर उसकी सक्सेस में आप खुद को देखने लग जाते हैं।
विजय मौर्या द्वारा लिखे डायलॉग परफेक्ट हैं। वहीं जोया और रीमा कागती द्वारा लिखा गया स्क्रीनप्ले भी प्रभावशाली है। जोया के कसे हुए निर्देशन और कहानी के दम पर रणवीर-आलिया भी अपने अब तक के करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते नजर आते हैं। दोनों की केमिस्ट्री भी उम्दा है।
फिल्म से डेब्यू कर रहे सिद्धांत चतुर्वेदी की स्क्रीन प्रेजेंस अच्छी है।जोया ने स्टारकास्ट के चयन में सावधानी बरती है। विजय राज(मुराद के पिता), विजय वर्मा (मुराद के दोस्त मोइन) और सैफीना चड्ढा (सैफीना की मां)के रोल में सबकी एक्टिंग अच्छी है लेकिन रणवीर की मां के रोल में अमृता सुभाष फीकी नजर आती हैं। साथ ही कल्कि कोच्लिन भी अपने किरदार में फिट नहीं बैठती हैं।
‘प्रधानमंत्री के कहने पर रोड़े अटका रहीं राज्यपाल’
धरने में कांग्रेस को द्रमुक का भी साथ मिला है। नारायणसामी का आरोप है कि राज्यपाल सरकार के रोज के कामकाज में भी दखल दे रही हैं। मुख्यमंत्री ने न्यूज एजेंसी से कहा कि बेदी के पास अपनी कोई पावर नहीं है। वे सिर्फ मंत्रियों द्वारा भेजे गए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए हैं। उन्हें कैबिनेट के फैसलों को रोकने का अधिकार नहीं है, लेकिन वे हमारे निर्णयों को वीटो कर रही हैं। खुद प्रधानमंत्री उन्हें हमारी सरकार के कामों में रोड़े अटकाने के लिए कह रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
दो दिन पहले बेदी ने कहा था कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाना चाहिए। वहीं, सरकार का कहना था कि वह पहले जागरुकता फैलाएगी फिर इसे अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच विवाद पैदा हो गया।
बेदी ने किया ट्वीट
बेदी ने बुधवार शाम नारायणसामी को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को धरने पर बैठने से पहले मुझसे मुलाकात करनी चाहिए थी। आप पहले एक पत्र लिखते और मेरे जवाब का इंतजार करते। बेदी ने 21 फरवरी को मुख्यमंत्री को बातचीत के लिए बुलाया है।
यह रैप आर्टिस्ट्स नैजी और डिवाइन की जिंदगी से प्रेरित सच्ची कहानी है जो धारावी की तंग गलियों से निकलकर रैपर बनने के सपने को साकार कर जाते हैं। फिल्म की शुरुआत में दिखाया जाता है कि मुराद अपने डॉमिनेटिंग और रुढ़िवादी पिता (विजय राज) और बीमार मां (अमृता सुभाष) के साथ गरीबी की जिंदगी बिता रहा है। मां और पिता हमेशा झगड़ते रहते हैं और जिंदगी तंगहाली में ही गुजर रही है जिससे मुराद खुश नहीं है।
वह अपने पिता के बताए रास्ते की बजाए कुछ अलग करना चाहता है और रैपर बनना चाहता है। इस अर्थ हीन जिंदगी में उसके लिए केवल एक ही सुकून भरी चीज है और वह है उसके बचपन का प्यार सैफीना (आलिया भट्ट)। सैफीना सर्जन बनने की पढ़ाई कर रही है। वह भी एक रुढ़िवादी परिवार से है जिसे आम लड़कियों की तरह घूमने-फिरने की आजादी नहीं है लेकिन इसके बावजूद वह मुराद के साथ कुछ सुकून भरे पल बिताने के मौके ढूंढ लेती है।
मुराद की जिंदगी में तब बदलाव आने शुरू होते हैं जब उसकी मुलाकात एमसी शेर (सिद्धांत चतुर्वेदी) से होती है। एमसी मुराद के अंदर छुपे टैलेंट को पहचान लेता है और उसके अंदर रैपर बनने के सपने को हकीकत में बदलने का जोश भरता है।
सैफीना और मुराद की स्ट्रगलिंग लाइफ के साथ जोया ने बेहतरीन कहानी चुनी है जिसका हर सीन इतना बेहतरीन है कि आप आसानी से फिल्म का हिस्सा बनते चले जाते हैं और उसे अपने अंदर महसूस करने लग जाते हैं। मुराद की हार में आपको अपनी हार और फिर उसकी सक्सेस में आप खुद को देखने लग जाते हैं।
विजय मौर्या द्वारा लिखे डायलॉग परफेक्ट हैं। वहीं जोया और रीमा कागती द्वारा लिखा गया स्क्रीनप्ले भी प्रभावशाली है। जोया के कसे हुए निर्देशन और कहानी के दम पर रणवीर-आलिया भी अपने अब तक के करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते नजर आते हैं। दोनों की केमिस्ट्री भी उम्दा है।
फिल्म से डेब्यू कर रहे सिद्धांत चतुर्वेदी की स्क्रीन प्रेजेंस अच्छी है।जोया ने स्टारकास्ट के चयन में सावधानी बरती है। विजय राज(मुराद के पिता), विजय वर्मा (मुराद के दोस्त मोइन) और सैफीना चड्ढा (सैफीना की मां)के रोल में सबकी एक्टिंग अच्छी है लेकिन रणवीर की मां के रोल में अमृता सुभाष फीकी नजर आती हैं। साथ ही कल्कि कोच्लिन भी अपने किरदार में फिट नहीं बैठती हैं।
Wednesday, February 6, 2019
राहुल गांधी ने कहा, मोदी के ख़िलाफ़ मुर्दाबाद के नारे न लगाएं - बड़ी चुनावी ख़बरें
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वह राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के लिए 'मुर्दाबाद' के नारे न लगाएं.
ओडिशा के राऊरकेला में एक जनसभा में भाषण देते समय जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया तो पार्टी कार्यकर्ता मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे जिस पर राहुल ने कहा कि वे बीजेपी पर प्यार और स्नेह से जीत दर्ज करें.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कहा, "ये शब्द (मुर्दाबाद) बीजेपी/आरएसएस के लोग इस्तेमाल करते हैं. हम कांग्रेस में इन शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते हैं क्योंकि हम प्यार और स्नेह में विश्वास करते हैं."
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के चेहरे पर हाव-भाव में बदलाव आया है और वह चारों तरफ़ से घिर गए हैं.
ग़ौरतलब है कि जून 2018 में लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा था कि उनके दिल में ज़र्रा भर भी नफ़रत नहीं है और इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को गले लगा लिया.
बीजेपी प्रमुख अमित शाह का कहना है कि 2019 का लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री मोदी बनाम तमाम राजनीतिक पार्टियां हैं.
अलीगढ़ में बीजेपी के बूथ कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गुंडों के उत्साह को ठंडा कर दिया है.
शाह ने कहा कि पहले की सरकारों में भू-माफ़ियाओं के सामने किसी की नहीं चलती थी लेकिन योगी सरकार ने क़ानून को कड़ाई से लागू किया है.
बीजेपी प्रमुख ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी के ख़िलाफ़ सारी पार्टियां एकजुट हो रही हैं.
ओडीशा में कालाहांडी ज़िले के भवानीपटना में एक रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर तीखा हमला बोला.
राहुल गांधी ने कहा कि मोदी और पटनायक दोनों प्रदेश के ग़रीबों की ज़मीन छीन अपने उद्योगपति दोस्तों के हवाले कर रहे हैं. कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि पटनायक मोदी के रिमोट कंट्रोल पर काम कर रहे हैं.
राहुल ने कहा, ''पीएम मोदी ने आपको रफ़ाल घोटाला दिया और हम लोग सत्ता में आएंगे तो सुनिश्चित आय देंगे. दुनिया का कोई भी देश ऐसा नहीं कर पाया है लेकिन कांग्रेस की सरकार ऐसा कर दिखाएगी. यह वादा बीजेपी के 15 लाख वाले वादे की तरह नहीं है.''
सोशल मीडिया से अक्सर दूरी रखने वालीं बसपा प्रमुख मायावती आख़िरकार सोशल मीडिया पर आ गई हैं. हालांकि, मायावती का ट्विटर अकाउंट पिछले साल अक्टूबर में बन चुका था लेकिन इससे उन्होंने 22 जनवरी को पहली बार ट्वीट किया था.
इसके बाद बुधवार सुबह तक उनका यह अकाउंट वेरिफ़ाइड भी नहीं था लेकिन अब यह वेरिफ़ाइड हो चुका है और इसे 13 हज़ार से अधिक लोग फ़ॉलो भी कर चुके हैं.
22 जनवरी को किए गए ट्वीट में उन्होंने ख़ुद के ट्विटर पर आने की घोषणा की थी. हालांकि, आज इसकी घोषणा प्रेस रिलीज़ जारी कर की गई है. प्रेस रिलीज़ को उनके ट्विटर हैंडल @SushriMayawati से भी ट्वीट किया गया है.
उनके ट्विटर पर आने का बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी स्वागत किया है.
उन्होंने लिखा कि वह उन्हें ट्विटर पर देखकर ख़ुश हैं और उन्होंने लखनऊ में 13 जनवरी को की गई मुलाक़ात में यह सुझाव दिया था जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है.
लोकप्रिय टीवी अभिनेत्री शिल्पा शिंदे मंगलवार को कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गईं. मुंबई के कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर शिल्पा शिंदे को कांग्रेस की सदस्यता दी.
इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कांग्रेस नेता चरण सिंह सपरा भी मौजूद थे. 42 साल की शिंदे ने 1999 में टीवी पर अभिनय की शुरुआत की थी लेकिन लोकप्रियता टीवी सीरियल 'भाभी जी घर पर हैं' से मिली. इस सीरियल में शिल्पा शिंदे अंगूरी भाभी का किरदार निभाती थीं. शिल्पा शिंदे बिग बॉस 11 की भी विजेता रही हैं.
ओडिशा के राऊरकेला में एक जनसभा में भाषण देते समय जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया तो पार्टी कार्यकर्ता मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे जिस पर राहुल ने कहा कि वे बीजेपी पर प्यार और स्नेह से जीत दर्ज करें.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कहा, "ये शब्द (मुर्दाबाद) बीजेपी/आरएसएस के लोग इस्तेमाल करते हैं. हम कांग्रेस में इन शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते हैं क्योंकि हम प्यार और स्नेह में विश्वास करते हैं."
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के चेहरे पर हाव-भाव में बदलाव आया है और वह चारों तरफ़ से घिर गए हैं.
ग़ौरतलब है कि जून 2018 में लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा था कि उनके दिल में ज़र्रा भर भी नफ़रत नहीं है और इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को गले लगा लिया.
बीजेपी प्रमुख अमित शाह का कहना है कि 2019 का लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री मोदी बनाम तमाम राजनीतिक पार्टियां हैं.
अलीगढ़ में बीजेपी के बूथ कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गुंडों के उत्साह को ठंडा कर दिया है.
शाह ने कहा कि पहले की सरकारों में भू-माफ़ियाओं के सामने किसी की नहीं चलती थी लेकिन योगी सरकार ने क़ानून को कड़ाई से लागू किया है.
बीजेपी प्रमुख ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी के ख़िलाफ़ सारी पार्टियां एकजुट हो रही हैं.
ओडीशा में कालाहांडी ज़िले के भवानीपटना में एक रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर तीखा हमला बोला.
राहुल गांधी ने कहा कि मोदी और पटनायक दोनों प्रदेश के ग़रीबों की ज़मीन छीन अपने उद्योगपति दोस्तों के हवाले कर रहे हैं. कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि पटनायक मोदी के रिमोट कंट्रोल पर काम कर रहे हैं.
राहुल ने कहा, ''पीएम मोदी ने आपको रफ़ाल घोटाला दिया और हम लोग सत्ता में आएंगे तो सुनिश्चित आय देंगे. दुनिया का कोई भी देश ऐसा नहीं कर पाया है लेकिन कांग्रेस की सरकार ऐसा कर दिखाएगी. यह वादा बीजेपी के 15 लाख वाले वादे की तरह नहीं है.''
सोशल मीडिया से अक्सर दूरी रखने वालीं बसपा प्रमुख मायावती आख़िरकार सोशल मीडिया पर आ गई हैं. हालांकि, मायावती का ट्विटर अकाउंट पिछले साल अक्टूबर में बन चुका था लेकिन इससे उन्होंने 22 जनवरी को पहली बार ट्वीट किया था.
इसके बाद बुधवार सुबह तक उनका यह अकाउंट वेरिफ़ाइड भी नहीं था लेकिन अब यह वेरिफ़ाइड हो चुका है और इसे 13 हज़ार से अधिक लोग फ़ॉलो भी कर चुके हैं.
22 जनवरी को किए गए ट्वीट में उन्होंने ख़ुद के ट्विटर पर आने की घोषणा की थी. हालांकि, आज इसकी घोषणा प्रेस रिलीज़ जारी कर की गई है. प्रेस रिलीज़ को उनके ट्विटर हैंडल @SushriMayawati से भी ट्वीट किया गया है.
उनके ट्विटर पर आने का बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी स्वागत किया है.
उन्होंने लिखा कि वह उन्हें ट्विटर पर देखकर ख़ुश हैं और उन्होंने लखनऊ में 13 जनवरी को की गई मुलाक़ात में यह सुझाव दिया था जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है.
लोकप्रिय टीवी अभिनेत्री शिल्पा शिंदे मंगलवार को कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गईं. मुंबई के कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर शिल्पा शिंदे को कांग्रेस की सदस्यता दी.
इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कांग्रेस नेता चरण सिंह सपरा भी मौजूद थे. 42 साल की शिंदे ने 1999 में टीवी पर अभिनय की शुरुआत की थी लेकिन लोकप्रियता टीवी सीरियल 'भाभी जी घर पर हैं' से मिली. इस सीरियल में शिल्पा शिंदे अंगूरी भाभी का किरदार निभाती थीं. शिल्पा शिंदे बिग बॉस 11 की भी विजेता रही हैं.
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