भोपाल से भाजपा की प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने मालेगांव धमाकों में लगे आरोप पर फिर सफ़ाई दी है. बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्होंने 'कोई कुकर्म नहीं किया जो मालेगांव का भूत हमेशा उनके पीछे लगा रहेगा'.
उन्होंने हिंदू धर्म को शांति का प्रतीक बताया और मुसलमानों को 'हमारे अपने लोग' कहा. उन्होंने 'हिंदू आतंकवाद' की धारणा को ख़ारिज करते हुए इसे कांग्रेस नेताओं के दिमाग़ की उपज बताया.
उन्होंने ये भी कहा कि यूपीए सरकार में गृह सचिव रहे और अब भाजपा नेता आरके सिंह की ओर से अतीत में 'हिंदू आतंकवाद' शब्द इस्तेमाल किए जाने की जानकारी उन्हें नहीं है.
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में एक बाइक में लगाए गए दो बमों के फटने से सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सौ से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे.
साध्वी प्रज्ञा पर पहले महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) लगाया गया था लेकिन बाद में कोर्ट ने उसे हटा लिया और उन पर ग़ैर-क़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला चला.
साध्वी प्रज्ञा मालेगांव बम धमाकों के मामले में नौ साल तक जेल में रहीं और फ़िलहाल ज़मानत पर बाहर हैं. प्रज्ञा आरोप लगाती हैं कि तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने उन्हें झूठे मामले में फंसाया है.
भाजपा ने उन्हें भोपाल से वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ चुनावी मैदान में उतारा है.
साध्वी की तरह रहने वाली प्रज्ञा गेरुआ वस्त्र पहनती हैं और 'हरिओम' उनका अभिवादन होता है. बीबीसी ने उनसे बात की तो पहले उन्होंने यही कहा कि 'मैं बात करूंगी लेकिन आप मुझे मैडम न कहें. साध्वी जी कहें.'
दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ भाजपा को अपने संगठन का कोई पुराना नेता नहीं मिला जो आपको उतारा गया. इसे आप कैसे देखती हैं?
आप क्या समझते हैं कि मुझे उतारना भाजपा की मजबूरी रही या मैं योग्य नहीं हूं?
भाजपा का काम समाज से चलता है. यहां एक परिवार को अधिकार नहीं है कि वही राजनीति करेगा. यहां जो योग्य है और जिसे अवसर मिलता है, वो चुनाव में खड़ा हो जाता है.
भाजपा ने आपसे संपर्क किया या आपकी ओर से किया गया?
नहीं ये तो प्रक्रिया थी. ऐसा तो नहीं है कि ये एकाध दिन की प्रक्रिया है. ये चलती है. किसने क्या किया ये तो मुझे याद नहीं है. पर संपर्क हुआ. निश्चित तौर पर योजनाएं तय होती हैं. समाज के समक्ष किसे नेतृत्व करना है, ये उनकी ओर से तय होता है.
अपने प्रति दिग्विजय सिंह के लिए कोई संदेश है आपका?
आज भी मैं यही कहूंगी. साधु-संन्यासी यही कहते हैं कि अधर्म का मार्ग छोड़कर धर्म का मार्ग पकड़िए. असत्य का मार्ग छोड़कर सत्य का मार्ग पकड़िए. बस इतना ही कहूंगी.
मैं स्वयं प्रत्यक्ष प्रमाण हूं इसका (लंबा विराम). उन्होंने जो षड्यंत्र किए उन षड्यंत्रों का और जो मैंने सहा है उनके षड्यंत्रों के कारण, मैं उसका प्रत्यक्ष प्रमाण हूं.
आप मालेगांव धमाका मामले की ओर इशारा कर रही हैं, जिसका ज़िक्र बार-बार होता है. आप अभी ज़मानत पर बाहर हैं. बरी नहीं हुई हैं. जब आप चुनाव में उतरेंगी तो इसका भूत आपका पीछा नहीं छोड़ेगा. आप पर एक दाग़ तो है ही.
मैं एक ही बात कहूंगी. मैं तो किसी भी प्रकार से, अंश मात्र भी, कोई हमारी कहीं लिप्तता नहीं है. फिर भी जो जेल में बैठ चुके हैं और जो अभी ज़मानत पर हैं, कांग्रेस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व सभी ज़मानत पर हैं. हम तो इन्हीं के द्वारा प्रताड़ित हैं, हम तो इन्हीं के द्वारा डाले गए हैं. ये तो षड्यंत्र करके ही ऐसा किया उन्होंने.
पीछा छोड़ने का अर्थ ये नहीं है कि मैंने कोई कुकर्म या दुष्कर्म किया है, जिसके कारण मेरे पीछे कुछ लगा हुआ है. बल्कि इनके कुकर्म को हम भोग रहे हैं. न मैंने कोई भ्रष्टाचार किया है, न कोई अनाचार किया है. न कोई घपला किया है और न देश के विरुद्ध बोला है.
लेकिन आपकी छवि हिंदू अतिवाद की है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता. और इसकी आलोचना दिग्विजय सिंह लगातार करते रहे. आपके आने से लोग कह रहे हैं कि भोपाल की सीट पर धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण होगा.
मैं सिर्फ़ इतना कहना चाहूंगी कि जो इन्होंने हिंदुत्व की परिभाषा दी है, कभी उन्होंने हिंदुत्व को आतंकवादी कह दिया, कभी सॉफ्ट हिंदुत्व कह दिया, कभी कट्टर कह दिया. लेकिन हिंदुत्व का चिंतन कितना व्यापक है, वो एक श्लोक से ही प्रकट होता है- 'वसुधैव कुटुम्बकम.' 'सर्वे भवंतु सुखिन:, सर्वे संतु निरामय:' इतनी बड़ी सोच, इतना बड़ा चिंतन, इतना वृहद हमारा धर्म है कि उसमें कहीं कट्टर या सॉफ्ट जैसी चीज़ें नहीं आतीं.
हिंदुत्व पूरी पृथ्वी पर सुखमय जीवन देखना चाहता है. पृथ्वी ही क्या हमारे यहां तो सब जगह शांति का संदेश दिया गया है. (इसके बाद वह शांति पाठ पढ़ने लगती हैं.)
आपने वसुधैव कुटुम्बकम का ज़िक्र किया, अक्सर संघ परिवार भी इसका ज़िक्र करता है. इसका अर्थ है कि पूरा विश्व ही हमारा परिवार है. तो क्या इस परिवार में मुसलमान शामिल नहीं हैं?
मुसलमान कहां से आए? भारत में जो हिंदू हैं, वे कन्वर्टेड लोग हैं. सनातन से निकले लोग हैं. देश-काल-परिस्थिति के अनुसार इनके पूर्वजों ने या वर्तमान में किसी न किसी कारण से उन्होंने अपना धर्म छोड़ दिया. तो वो कहीं से थोड़े ही आए हैं, वे हमारे लोग हैं.
इस भारत का खाते हैं, पीते हैं, सोते हैं. उनके भी कर्तव्य हैं देश के लिए. जैसे हम संतान हैं देश की, ऐसे ही वे भी संतान हैं. हम क्यों ऐसा कहेंगे कि वे अलग हैं और हम अलग हैं. जब हमारी संस्कृति ऐसी है कि हम सबको आत्मसात करते हैं. भारत ही है, जहां सब समा जाते हैं. लेकिन बताइए कोई और ऐसा देश है जहां कोई देश में रहकर देश के विरुद्ध बात कर सकता हो.
Monday, April 22, 2019
Tuesday, April 16, 2019
ओडिशा में बड़ा कौन, मोदी या नवीन? - लोकसभा चुनाव 2019
तपती धूप में पाँच कारों का क़ाफ़िला ओडिशा के नंदनकानन के एक गांव से धीमी रफ़्तार में गुज़र रहा है.
आगे वाली खुली जीप में एक महिला खड़ी हुई है और झुक झुक कर लोगों से हाथ मिलते वक़्त उड़िया भाषा में कहती हैं, "पहले कोई नहीं आया तो क्या हुआ, हम तो आए हैं. बस मोदी जी को याद रखना".
फ़र्राटेदार ओडिया बोलने वाली इन महिला का नाम अपराजिता सारंगी है जो बिहार की मूल निवासी हैं और जिन्हें भाजपा ने भुवनेश्वर लोक सभा सीट से टिकट दिया है.
अपराजिता पूर्व आईएएस अधिकारी हैं जिन्होंने कुछ दिनों पहले वीआरएस ले लिया था.
उन्होंने कहा,"मैं राजनीति में दो कारणों से आई. पहला, मोदी जी और अमित शाह का नेतृत्व और दूसरा कुछ असल काम करने की चाह. वोट माँगते समय सबसे कहती हूँ कि इस राज्य में पिछले कई वर्षों से हर चीज़ के अस्थायी समाधान दिए जा रहे हैं जिन्हें बंद कर भाजपा की सरकार आनी चाहिए".
लोक सभा चुनावों के दूसरे चरण का मतदान ज़्यादा दूर नहीं है और सभी पार्टियों ने प्रचार में पूरा दम-खम लगा रखा है.
इसी कड़ी में भाजपा भी शामिल है जिसने 2014 के बाद से ओडिशा पर ख़ास ध्यान दे रखा है.
वजह साफ़ है. पिछले कई सालों से प्रदेश में भाजपा की राजनीतिक साख कमज़ोर रही है.
क़रीब 10 वर्ष पहले तक तो नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (बीजेडी) से पार्टी का गठबंधन था. उन दिनों प्रदेश में भाजपा से ज़्यादा लोग बीजेडी को ही जानते थे.
पिछले आम चुनावों में भी भाजपा को ओडिशा में करारी शिकस्त मिली थी.
प्रदेश की 21 लोक सभा सीटों में से पार्टी के पास मात्र एक सीट है और 147 सदस्यों वाली विधान सभा में बमुश्किल से 10 विधायक हैं.
अगर विधायकों की बात हो तो कांग्रेस के पास भाजपा से ज़्यादा विधायक हैं.
धर्मेंद्र प्रधान का करिश्मा
चुनाव जीतने के साथ ही नरेंद्र मोदी कैबिनेट में ओडिशा के दो नेताओं, धर्मेंद्र प्रधान और जुअल ओरम, को जगह मिली और निर्देश भी कि 'मिशन ओडिशा' अब अगला पड़ाव है.
हालाँकि, राज्य के बड़े हिस्सों में इन दोनों नेताओं की कोई राजनीतिक ख़ास करिश्मा नहीं रहा है, लेकिन फिर भी प्रदेश में पार्टी के बड़े फ़ैसले धर्मेंद्र प्रधान लेते रहे हैं.
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बीबीसी से हुई बातचीत में उस दौर की कमियों पर भी बात की.
उन्होंने कहा, "पिछले चुनाव में देशभर में मोदी लहर थी जिसके बावजूद ओडिशा में हम इसका फ़ायदा नहीं उठा पाए. हम मोदी लहर को वोट में परिवर्तित नहीं कर पाए. हमारी संस्थागत क्षमता कम थी."
धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक़, "बीते पांच साल में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बार-बार ओडिशा का दौरा किया है और ज़िला स्तर तक पहुंचे हैं, पार्टी के संगठन के विस्तार की बड़ी योजना बनाई, समाज के हर वर्ग के लोगों को पार्टी से जोड़ा है."
हक़ीक़त यही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले कुछ सालों के दौरान ओडिशा में दो दर्जन से ज़्यादा रैलियां की हैं.
भाजपा की इस रणनीति का कुछ नतीजा तब दिखा जब 2017 के पंचायत चुनावों में पार्टी को प्रदेश में पहले से कहीं ज़्यादा सीटें मिलीं.
यही वजह है कि अब पार्टी प्रदेश में पूरे जोश के साथ लगी हुई है.
राजधानी भुवनेश्वर से ब्रह्मपुर, कालाहांडी या पुरी तक, हर जगह भाजपा के बड़े-बड़े होर्डिंग दिखाई पड़ते हैं.
दिलचस्प बात ये है कि उन सभी पर सिर्फ़ एक ही तस्वीर दिखती है, नरेंद्र मोदी की.
भाजपा के किसी भी स्थानीय नेता की तस्वीर बैनरों पर मिलना मुश्किल है. सिर्फ़ उन उमीदवारों की ज़रूर दिखती हैं जो अपने-अपने क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे हैं.
सड़कों पर लाउडस्पीकर और बड़ी एलसीडी स्क्रीनों पर या तो नरेंद्र मोदी के भाषण चल रहे हैं और या केंद्र में सत्ताधारी भाजपा सरकार की स्कीमें.
दूसरी दिलचस्प बात ये कि भाजपा के नरेंद्र मोदी वाले लगभग सभी बैनर-होर्डिंग वग़ैरह के पास ही आपको बीजू जनता दल प्रमुख और ओडिशा में 19 साल से मुख्यमंत्री रहे नवीन पटनायक के भी बैनर दिखेंगे.
तो क्या ओडिशा में लोक सभा और विधान सभा चुनाव नरेंद्र बनाम नवीन है?
उत्कल विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र विभाग के प्रमुख रहे प्रोफ़ेसर अमरेश्वर मिश्र को लगता है कि वजह एक और है.
उन्होंने बताया, "एक चेंज हो रहा है कि थोड़ा सा भाजपा आगे बढ़ रही है और कांग्रेस पीछे हो रही है. सो अभी जो लड़ाई है, आप देखेंगे बीजेपी और बीजेडी के बीच में ही होगी. लेकिन, जो लोग सत्ता में हैं, उसका थोड़ा ज़्यादा फ़ायदा होता है, आप यहाँ पूछेंगे गाँव में जाकर तो मिलेगा नवीन पटनायक ने सब किया है.''
बात में वज़न तब दिखा जब हम ग्रामीण इलाक़ों के दौरे पर गए. क्योंकि प्रदेश में बीजू जनता दल का कई दशकों से संगठनात्मक तरीक़े से काम होता रहा है तो नवीन पटनायक का कैडर काफ़ी फैला हुआ है. इसमें भी कोई शक नहीं कि वे लगभग दो दशक से वे प्रदेश के सबसे लोकप्रिय नेता भी हैं.
आगे वाली खुली जीप में एक महिला खड़ी हुई है और झुक झुक कर लोगों से हाथ मिलते वक़्त उड़िया भाषा में कहती हैं, "पहले कोई नहीं आया तो क्या हुआ, हम तो आए हैं. बस मोदी जी को याद रखना".
फ़र्राटेदार ओडिया बोलने वाली इन महिला का नाम अपराजिता सारंगी है जो बिहार की मूल निवासी हैं और जिन्हें भाजपा ने भुवनेश्वर लोक सभा सीट से टिकट दिया है.
अपराजिता पूर्व आईएएस अधिकारी हैं जिन्होंने कुछ दिनों पहले वीआरएस ले लिया था.
उन्होंने कहा,"मैं राजनीति में दो कारणों से आई. पहला, मोदी जी और अमित शाह का नेतृत्व और दूसरा कुछ असल काम करने की चाह. वोट माँगते समय सबसे कहती हूँ कि इस राज्य में पिछले कई वर्षों से हर चीज़ के अस्थायी समाधान दिए जा रहे हैं जिन्हें बंद कर भाजपा की सरकार आनी चाहिए".
लोक सभा चुनावों के दूसरे चरण का मतदान ज़्यादा दूर नहीं है और सभी पार्टियों ने प्रचार में पूरा दम-खम लगा रखा है.
इसी कड़ी में भाजपा भी शामिल है जिसने 2014 के बाद से ओडिशा पर ख़ास ध्यान दे रखा है.
वजह साफ़ है. पिछले कई सालों से प्रदेश में भाजपा की राजनीतिक साख कमज़ोर रही है.
क़रीब 10 वर्ष पहले तक तो नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (बीजेडी) से पार्टी का गठबंधन था. उन दिनों प्रदेश में भाजपा से ज़्यादा लोग बीजेडी को ही जानते थे.
पिछले आम चुनावों में भी भाजपा को ओडिशा में करारी शिकस्त मिली थी.
प्रदेश की 21 लोक सभा सीटों में से पार्टी के पास मात्र एक सीट है और 147 सदस्यों वाली विधान सभा में बमुश्किल से 10 विधायक हैं.
अगर विधायकों की बात हो तो कांग्रेस के पास भाजपा से ज़्यादा विधायक हैं.
धर्मेंद्र प्रधान का करिश्मा
चुनाव जीतने के साथ ही नरेंद्र मोदी कैबिनेट में ओडिशा के दो नेताओं, धर्मेंद्र प्रधान और जुअल ओरम, को जगह मिली और निर्देश भी कि 'मिशन ओडिशा' अब अगला पड़ाव है.
हालाँकि, राज्य के बड़े हिस्सों में इन दोनों नेताओं की कोई राजनीतिक ख़ास करिश्मा नहीं रहा है, लेकिन फिर भी प्रदेश में पार्टी के बड़े फ़ैसले धर्मेंद्र प्रधान लेते रहे हैं.
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बीबीसी से हुई बातचीत में उस दौर की कमियों पर भी बात की.
उन्होंने कहा, "पिछले चुनाव में देशभर में मोदी लहर थी जिसके बावजूद ओडिशा में हम इसका फ़ायदा नहीं उठा पाए. हम मोदी लहर को वोट में परिवर्तित नहीं कर पाए. हमारी संस्थागत क्षमता कम थी."
धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक़, "बीते पांच साल में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बार-बार ओडिशा का दौरा किया है और ज़िला स्तर तक पहुंचे हैं, पार्टी के संगठन के विस्तार की बड़ी योजना बनाई, समाज के हर वर्ग के लोगों को पार्टी से जोड़ा है."
हक़ीक़त यही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले कुछ सालों के दौरान ओडिशा में दो दर्जन से ज़्यादा रैलियां की हैं.
भाजपा की इस रणनीति का कुछ नतीजा तब दिखा जब 2017 के पंचायत चुनावों में पार्टी को प्रदेश में पहले से कहीं ज़्यादा सीटें मिलीं.
यही वजह है कि अब पार्टी प्रदेश में पूरे जोश के साथ लगी हुई है.
राजधानी भुवनेश्वर से ब्रह्मपुर, कालाहांडी या पुरी तक, हर जगह भाजपा के बड़े-बड़े होर्डिंग दिखाई पड़ते हैं.
दिलचस्प बात ये है कि उन सभी पर सिर्फ़ एक ही तस्वीर दिखती है, नरेंद्र मोदी की.
भाजपा के किसी भी स्थानीय नेता की तस्वीर बैनरों पर मिलना मुश्किल है. सिर्फ़ उन उमीदवारों की ज़रूर दिखती हैं जो अपने-अपने क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे हैं.
सड़कों पर लाउडस्पीकर और बड़ी एलसीडी स्क्रीनों पर या तो नरेंद्र मोदी के भाषण चल रहे हैं और या केंद्र में सत्ताधारी भाजपा सरकार की स्कीमें.
दूसरी दिलचस्प बात ये कि भाजपा के नरेंद्र मोदी वाले लगभग सभी बैनर-होर्डिंग वग़ैरह के पास ही आपको बीजू जनता दल प्रमुख और ओडिशा में 19 साल से मुख्यमंत्री रहे नवीन पटनायक के भी बैनर दिखेंगे.
तो क्या ओडिशा में लोक सभा और विधान सभा चुनाव नरेंद्र बनाम नवीन है?
उत्कल विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र विभाग के प्रमुख रहे प्रोफ़ेसर अमरेश्वर मिश्र को लगता है कि वजह एक और है.
उन्होंने बताया, "एक चेंज हो रहा है कि थोड़ा सा भाजपा आगे बढ़ रही है और कांग्रेस पीछे हो रही है. सो अभी जो लड़ाई है, आप देखेंगे बीजेपी और बीजेडी के बीच में ही होगी. लेकिन, जो लोग सत्ता में हैं, उसका थोड़ा ज़्यादा फ़ायदा होता है, आप यहाँ पूछेंगे गाँव में जाकर तो मिलेगा नवीन पटनायक ने सब किया है.''
बात में वज़न तब दिखा जब हम ग्रामीण इलाक़ों के दौरे पर गए. क्योंकि प्रदेश में बीजू जनता दल का कई दशकों से संगठनात्मक तरीक़े से काम होता रहा है तो नवीन पटनायक का कैडर काफ़ी फैला हुआ है. इसमें भी कोई शक नहीं कि वे लगभग दो दशक से वे प्रदेश के सबसे लोकप्रिय नेता भी हैं.
Tuesday, April 9, 2019
दो युवक बाइक पर युवती का शव 22 किलोमीटर तक ले गए, शिकायत के बाद भी पुलिस ने नहीं रोका
बहरोड़ (अलवर). अलवर के एनएच-48 हाईवे पर सोमवार को दो युवकों को युवती का शव ले जाते देखा गया। ऐसा बताया गया कि वे शव को कोटपूतली से बहरोड़ तक लेकर गए। उन्होंने करीब 22 किमी का सफर तय किया। इस दौरान उन्हें कई लोगों ने देखा। जयपुर की रहने वाली एक लड़की ने इसकी शिकायत पुलिस और हाइवे पेट्रोलिंग से की, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। यहां तक कि उन्हें रोका भी नहीं गया।
जिस लड़की ने शिकायत की उसका नाम रवीना है। उसने बताया, "मैं कार से दिल्ली से जयपुर जा रही थी। मैंने देखा बाइक पर सवार दो लोग एक युवती को ले जा रहे हैं। युवती ने चप्पल नहीं पहनी थी। शरीर निढाल था। मुझे लगा कि अपहरण का मामला है। इसलिए तुरंत हाईवे पर खड़ी कोटपूतली क्षेत्र पुलिस को इस बारे में बताया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने कहा- यहां तो यह चलता रहता है। आप जाओ।"
पुलिस का रवैया गैर-जिम्मेदाराना था : रवीना ने बताया, "पुलिस का रवैया देख मैंने कार से बाइक का पीछा किया। बहरोड़ क्षेत्र में गांव जैनपुरबास और पहाड़ी के बीच देवस्थली स्कूल के सामने बाइक को रोक लिया। हाइवे पुलिस को भी सूचित कर दिया, लेकिन बहरोड़ से हाईवे पेट्रोलिंग पुलिस पहुंचने से पहले ही बाइक सवार युवक यह कहते हुए चले गए कि यह हमारे परिवार की है। बेहोश हो गई है, इलाज के लिए ले जा रहे हैं।" उधर, बबेड़ी क्षेत्र में पता करने पर युवती की मौत की बात तो सामने आई।
यूपी से बाड़ी करने आए परिवार की युवती थी : हाइवे पेट्रोल पुलिस मौके पर पहुंची। उसने पूछताछ की, तो पता चला कि वे लोग उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं। मुस्लिम परिवार से हैं। उनके परिवार में एक युवती को इलाज के लिए कोटपूतली लेकर गए थे। जहां युवती की मौत हो गई। युवक बाइक पर जिस युवती को ला रहे थे संभवत: वह मृत थी। ऐसा बताया गया कि यह जानकारी मिलने के बाद भी हाइवे पेट्रोल पुलिस यह मामला बानसूर थाना क्षेत्र का बताते हुए बिना कार्रवाई लौट गई। यहां तक कि बानसूर थाना पुलिस को सूचना भी नहीं दी गई।
पुलिस ने माना- लड़की ने शिकायत की थी : एनएच-8 हाइवे पेट्रोलिंग, बहरोड के कार्यवाहक इंचार्ज सतीश कुमार ने माना कि जयपुर निवासी कार सवार लड़की ने किसी युवती के बाइक पर अपहरण होने की जानकारी दी। हम जैनपुरवास पहुंचे तो बाइक सवार युवकों के बानसूर के बबेड़ी की साइड निकलने की सूचना मिली। बबेड़ी में पता किया। बताया गया कि युवती को इलाज के लिए कोटपूतली ले गए थे और रास्ते में मौत हो जाने से बाइक पर वापस ला रहे थे।
'कांग्रेस की वजह से देश बंटा'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "कांग्रेस अपने घोषणापत्र में हम धारा 370 नहीं हटाएंगे की बात करती है। कांग्रेस में अक्ल होती तो 1947 में देश नहीं बंटता और पाक पैदा ही नहीं होता। मैं कांग्रेस वालों से कहता हूं कि दर्पण में जाकर अपना मुंह देखो। आपको मानवाधिकार की बात करने का कोई हक नहीं है। आप कांग्रेस वालों ने बालासाहेब (बाल ठाकरे) का मतदान करने का अधिकार छीन लिया था।"
"कांग्रेस और उसके महामिलावटी साथियों की वजह से ही देश में सुरक्षा की ऐसी स्थिति बनी रही। अब तो कांग्रेस कश्मीर में अलग प्रधानमंत्री चाहने वालों के साथ खड़ी है। उन्हें शर्म आनी चाहिए। कांग्रेस से तो देश को कोई उम्मीद नहीं, लेकिन शरदराव (शरद पवार) क्या आपको यह शोभा देता है? जम्मू कश्मीर के अलग हो जाने की बात करने वाले यह वे लोग हैं जिन पर देश ने भरोसा किया था। इनके दिल में जो इच्छा दबी है, यह जो चाहते हैं वह खुलकर सामने आ रहा है। ऐसे लोग क्या कश्मीर के हालात सुधार पाएंगे। इनकी सच्चाई देश के नागरिकों को समझनी चाहिए।"
'सेना से कितने सबूत चाहिए'
मोदी ने कहा कि दुनिया में कहीं भारत के खिलाफ एक झूठ निकलता है तो ये (कांग्रेस) उसे लपककर मीडिया में जगह बनाने की कोशिश करते हैं। कांग्रेस के नौजवानों और बुजुर्गों, आपको देश की सेना और वायुसेना से कितने सबूत चाहिए।
"पाक ने एयर स्ट्राइक के बाद कहा कि भारत के दो पायलट हमारे कब्जे में हैं। लेकिन शाम को ही उन्हें कहना पड़ा कि भारत का एक ही पायलट हमारे पास है। तो दूसरे पायलट का क्या हुआ, यह बच्चे-बच्चे को पता है। लेकिन अपने देश में ही जिन्हें जवानों की बात पर भरोसा नहीं है उन्हें सजा देना जरूरी है कि नहीं? अपने स्वार्थ के लिए इन्होंने देश की सुरक्षा को नजरअंदाज किया। अब जो फैसले हो रहे हैं, वो सिर्फ देश और लोगों को आगे रख कर किए जा रहे हैं। किसानों के लिए यूपी सरकार ने काम किया है।"
23 सीटों पर चुनाव लड़ रही है शिवसेना
एनडीए की आलोचना करती रही शिवसेना ने हाल ही में महाराष्ट्र में भाजपा से सीटों के बंटवारे पर समझौता किया है। भाजपा यहां 25 सीटों पर और शिवसेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। राज्य में 48 लोकसभा सीटें हैं। महाराष्ट्र में चार चरणों में 11, 18, 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। नतीजे 23 मई को घोषित किए जाएंगे।
जिस लड़की ने शिकायत की उसका नाम रवीना है। उसने बताया, "मैं कार से दिल्ली से जयपुर जा रही थी। मैंने देखा बाइक पर सवार दो लोग एक युवती को ले जा रहे हैं। युवती ने चप्पल नहीं पहनी थी। शरीर निढाल था। मुझे लगा कि अपहरण का मामला है। इसलिए तुरंत हाईवे पर खड़ी कोटपूतली क्षेत्र पुलिस को इस बारे में बताया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने कहा- यहां तो यह चलता रहता है। आप जाओ।"
पुलिस का रवैया गैर-जिम्मेदाराना था : रवीना ने बताया, "पुलिस का रवैया देख मैंने कार से बाइक का पीछा किया। बहरोड़ क्षेत्र में गांव जैनपुरबास और पहाड़ी के बीच देवस्थली स्कूल के सामने बाइक को रोक लिया। हाइवे पुलिस को भी सूचित कर दिया, लेकिन बहरोड़ से हाईवे पेट्रोलिंग पुलिस पहुंचने से पहले ही बाइक सवार युवक यह कहते हुए चले गए कि यह हमारे परिवार की है। बेहोश हो गई है, इलाज के लिए ले जा रहे हैं।" उधर, बबेड़ी क्षेत्र में पता करने पर युवती की मौत की बात तो सामने आई।
यूपी से बाड़ी करने आए परिवार की युवती थी : हाइवे पेट्रोल पुलिस मौके पर पहुंची। उसने पूछताछ की, तो पता चला कि वे लोग उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं। मुस्लिम परिवार से हैं। उनके परिवार में एक युवती को इलाज के लिए कोटपूतली लेकर गए थे। जहां युवती की मौत हो गई। युवक बाइक पर जिस युवती को ला रहे थे संभवत: वह मृत थी। ऐसा बताया गया कि यह जानकारी मिलने के बाद भी हाइवे पेट्रोल पुलिस यह मामला बानसूर थाना क्षेत्र का बताते हुए बिना कार्रवाई लौट गई। यहां तक कि बानसूर थाना पुलिस को सूचना भी नहीं दी गई।
पुलिस ने माना- लड़की ने शिकायत की थी : एनएच-8 हाइवे पेट्रोलिंग, बहरोड के कार्यवाहक इंचार्ज सतीश कुमार ने माना कि जयपुर निवासी कार सवार लड़की ने किसी युवती के बाइक पर अपहरण होने की जानकारी दी। हम जैनपुरवास पहुंचे तो बाइक सवार युवकों के बानसूर के बबेड़ी की साइड निकलने की सूचना मिली। बबेड़ी में पता किया। बताया गया कि युवती को इलाज के लिए कोटपूतली ले गए थे और रास्ते में मौत हो जाने से बाइक पर वापस ला रहे थे।
'कांग्रेस की वजह से देश बंटा'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "कांग्रेस अपने घोषणापत्र में हम धारा 370 नहीं हटाएंगे की बात करती है। कांग्रेस में अक्ल होती तो 1947 में देश नहीं बंटता और पाक पैदा ही नहीं होता। मैं कांग्रेस वालों से कहता हूं कि दर्पण में जाकर अपना मुंह देखो। आपको मानवाधिकार की बात करने का कोई हक नहीं है। आप कांग्रेस वालों ने बालासाहेब (बाल ठाकरे) का मतदान करने का अधिकार छीन लिया था।"
"कांग्रेस और उसके महामिलावटी साथियों की वजह से ही देश में सुरक्षा की ऐसी स्थिति बनी रही। अब तो कांग्रेस कश्मीर में अलग प्रधानमंत्री चाहने वालों के साथ खड़ी है। उन्हें शर्म आनी चाहिए। कांग्रेस से तो देश को कोई उम्मीद नहीं, लेकिन शरदराव (शरद पवार) क्या आपको यह शोभा देता है? जम्मू कश्मीर के अलग हो जाने की बात करने वाले यह वे लोग हैं जिन पर देश ने भरोसा किया था। इनके दिल में जो इच्छा दबी है, यह जो चाहते हैं वह खुलकर सामने आ रहा है। ऐसे लोग क्या कश्मीर के हालात सुधार पाएंगे। इनकी सच्चाई देश के नागरिकों को समझनी चाहिए।"
'सेना से कितने सबूत चाहिए'
मोदी ने कहा कि दुनिया में कहीं भारत के खिलाफ एक झूठ निकलता है तो ये (कांग्रेस) उसे लपककर मीडिया में जगह बनाने की कोशिश करते हैं। कांग्रेस के नौजवानों और बुजुर्गों, आपको देश की सेना और वायुसेना से कितने सबूत चाहिए।
"पाक ने एयर स्ट्राइक के बाद कहा कि भारत के दो पायलट हमारे कब्जे में हैं। लेकिन शाम को ही उन्हें कहना पड़ा कि भारत का एक ही पायलट हमारे पास है। तो दूसरे पायलट का क्या हुआ, यह बच्चे-बच्चे को पता है। लेकिन अपने देश में ही जिन्हें जवानों की बात पर भरोसा नहीं है उन्हें सजा देना जरूरी है कि नहीं? अपने स्वार्थ के लिए इन्होंने देश की सुरक्षा को नजरअंदाज किया। अब जो फैसले हो रहे हैं, वो सिर्फ देश और लोगों को आगे रख कर किए जा रहे हैं। किसानों के लिए यूपी सरकार ने काम किया है।"
23 सीटों पर चुनाव लड़ रही है शिवसेना
एनडीए की आलोचना करती रही शिवसेना ने हाल ही में महाराष्ट्र में भाजपा से सीटों के बंटवारे पर समझौता किया है। भाजपा यहां 25 सीटों पर और शिवसेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। राज्य में 48 लोकसभा सीटें हैं। महाराष्ट्र में चार चरणों में 11, 18, 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। नतीजे 23 मई को घोषित किए जाएंगे।
Monday, April 1, 2019
वार्नर-बेयरस्टो के तूफ़ान से पस्त विराट कोहली की टीम
आईपीएल-12 में रविवार को खेले गए पहले मुक़ाबलें में मेज़बान सनराइजर्स हैदराबाद ने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को ऐसी मात दी. जिसे वह लंबे समय तक भूल नहीं सकेगी.
अक्सर अपनी आक्रामकता के लिए जाने-जाने वाले कप्तान विराट कोहली की टीम को हैदराबाद के हाथों 118 रन से करारी मात का सामना करना पड़ा.
बैंगलोर के सामने जीत के लिए 232 रनों का विशाल लक्ष्य था जिसके जवाब में वह मैच की एक गेंद शेष रहते 113 रनों पर ढेर हो गई.
बैंगलोर की हार दीवार पर लिखी इबारत की तरह तब साफ़ नज़र आने लगी थी जब उसके पांच विकेट केवल 30 रन पर गिर चुके थे.
इनमें पार्थिव पटेल, सिमरोन हैटमायर, कप्तान विराट कोहली, एबी डिविलियर्स और मोइन अली के विकेट शामिल थे.
इसके बाद कोलिन डि ग्रैंडहोम ने 37, प्रयास बर्मन ने 19 और उमेश यादव ने 14 रन बनाकर जैसे-तैसे टीम को 100 रन से अधिक पर पहुंचाया.
नबी-संदीप का कमाल
हैदराबाद के गेंदबाज़ों के सामने उसकी पूर पारी 19.5 ओवर में महज़ 113 रन पर सिमट गई. हैदराबाद के मोहम्मद नबी ने 11 रन देकर चार और संदीप शर्मा ने 19 रन देकर तीन विकेट हासिल किए.
मैच ख़त्म होने के बाद बैंगलोर के कप्तान विराट कोहली ने कहा कि हैदराबाद ने उनकी टीम को क्रिकेट के हर क्षेत्र में पीछे छोड़ा. इसके साथ ही बैंगलोर के अभी से अंतिम चार में पहुंचने की संभावनाओं पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
यह बैंगलोर की इस आईपीएल मे लगातार तीसरी हार थी.
पहले मुक़ाबले में चेन्नई के ख़िलाफ़ केवल 70 रन पर सिमटने वाली बैंगलोर के कप्तान विराट कोहली के पास हैदराबाद में मिले परिणाम के बाद कुछ ख़ास कहने को था भी नहीं.
हैराबाद की जिस पिच पर वार्नर और बेयरस्टो ने उनके गेंदबाज़ों को नौसिखिया साबित किया उसी विकेट पर हैदराबाद के गेंदबाज़ों ने विराट के बल्लेबाज़ों को एक के बाद एक पेवेलियन की राह दिखाकर साबित कर दिया कि बैंगलोर की बल्लेबाज़ी में कहीं ना कहीं बड़ी गड़बड़ है.
इससे पहले हैदराबाद ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी की दावत का पूरा लुत्फ़ उठाया.
हैदराबाद के सलामी बल्लेबाज़ डेविड वार्नर ने ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी करते हुए केवल 55 गेंद पर पांच चौके और पांच छक्कों की मदद से नाबाद 100 रन बनाए.
उनके जोड़ीदार जॉनी बेयरस्टो ने भी केवल 56 गेंदों पर 12 चौके और सात छक्कों के सहारे 114 रन बनाए. इन दोनों बल्लेबाज़ों के बीच पहले विकेट के लिए 185 रनों की विशाल साझेदारी भी हुई.
बैंगलोर के ख़िलाफ़ नाबाद 100 रन बनाने से पहले वार्नर ने कोलकाता के ख़िलाफ 85 और राजस्थान रॉयल्स के ख़िलाफ 69 रनों की पारी खेली थी.
ऐसा लगाता है कि वार्नर ने तो इन तीन पारियों से ही विश्व कप के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम में अपना दावा मज़बूत कर लिया है. गेंद से छेड़छाड़ के आरोप से मुक्ति पाने के बाद लगता है अब उनका ग़ु्स्सा विरोधी गेंदबाज़ों की गेंद पर ही उतर रहा है.
स्टेडियम में मौजूद हर क्रिकेट प्रेमी अपने प्रिय खिलाड़ियों के हर करतब पर तालियां बजा रहा था. वार्नर और बेयरस्टो ने बैंगलोर के उमेश यादव, मोइन अली, युज्वेंद्र चहल और दूसरे गेंदाबाज़ों को क्लब क्रिकेट सरीखा साबित कर दिया.
अक्सर अपनी आक्रामकता के लिए जाने-जाने वाले कप्तान विराट कोहली की टीम को हैदराबाद के हाथों 118 रन से करारी मात का सामना करना पड़ा.
बैंगलोर के सामने जीत के लिए 232 रनों का विशाल लक्ष्य था जिसके जवाब में वह मैच की एक गेंद शेष रहते 113 रनों पर ढेर हो गई.
बैंगलोर की हार दीवार पर लिखी इबारत की तरह तब साफ़ नज़र आने लगी थी जब उसके पांच विकेट केवल 30 रन पर गिर चुके थे.
इनमें पार्थिव पटेल, सिमरोन हैटमायर, कप्तान विराट कोहली, एबी डिविलियर्स और मोइन अली के विकेट शामिल थे.
इसके बाद कोलिन डि ग्रैंडहोम ने 37, प्रयास बर्मन ने 19 और उमेश यादव ने 14 रन बनाकर जैसे-तैसे टीम को 100 रन से अधिक पर पहुंचाया.
नबी-संदीप का कमाल
हैदराबाद के गेंदबाज़ों के सामने उसकी पूर पारी 19.5 ओवर में महज़ 113 रन पर सिमट गई. हैदराबाद के मोहम्मद नबी ने 11 रन देकर चार और संदीप शर्मा ने 19 रन देकर तीन विकेट हासिल किए.
मैच ख़त्म होने के बाद बैंगलोर के कप्तान विराट कोहली ने कहा कि हैदराबाद ने उनकी टीम को क्रिकेट के हर क्षेत्र में पीछे छोड़ा. इसके साथ ही बैंगलोर के अभी से अंतिम चार में पहुंचने की संभावनाओं पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
यह बैंगलोर की इस आईपीएल मे लगातार तीसरी हार थी.
पहले मुक़ाबले में चेन्नई के ख़िलाफ़ केवल 70 रन पर सिमटने वाली बैंगलोर के कप्तान विराट कोहली के पास हैदराबाद में मिले परिणाम के बाद कुछ ख़ास कहने को था भी नहीं.
हैराबाद की जिस पिच पर वार्नर और बेयरस्टो ने उनके गेंदबाज़ों को नौसिखिया साबित किया उसी विकेट पर हैदराबाद के गेंदबाज़ों ने विराट के बल्लेबाज़ों को एक के बाद एक पेवेलियन की राह दिखाकर साबित कर दिया कि बैंगलोर की बल्लेबाज़ी में कहीं ना कहीं बड़ी गड़बड़ है.
इससे पहले हैदराबाद ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी की दावत का पूरा लुत्फ़ उठाया.
हैदराबाद के सलामी बल्लेबाज़ डेविड वार्नर ने ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी करते हुए केवल 55 गेंद पर पांच चौके और पांच छक्कों की मदद से नाबाद 100 रन बनाए.
उनके जोड़ीदार जॉनी बेयरस्टो ने भी केवल 56 गेंदों पर 12 चौके और सात छक्कों के सहारे 114 रन बनाए. इन दोनों बल्लेबाज़ों के बीच पहले विकेट के लिए 185 रनों की विशाल साझेदारी भी हुई.
बैंगलोर के ख़िलाफ़ नाबाद 100 रन बनाने से पहले वार्नर ने कोलकाता के ख़िलाफ 85 और राजस्थान रॉयल्स के ख़िलाफ 69 रनों की पारी खेली थी.
ऐसा लगाता है कि वार्नर ने तो इन तीन पारियों से ही विश्व कप के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम में अपना दावा मज़बूत कर लिया है. गेंद से छेड़छाड़ के आरोप से मुक्ति पाने के बाद लगता है अब उनका ग़ु्स्सा विरोधी गेंदबाज़ों की गेंद पर ही उतर रहा है.
स्टेडियम में मौजूद हर क्रिकेट प्रेमी अपने प्रिय खिलाड़ियों के हर करतब पर तालियां बजा रहा था. वार्नर और बेयरस्टो ने बैंगलोर के उमेश यादव, मोइन अली, युज्वेंद्र चहल और दूसरे गेंदाबाज़ों को क्लब क्रिकेट सरीखा साबित कर दिया.
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