दक्षिण कश्मीर के शोपियां में मंगलवार को सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया। सेना और पुलिस को इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की जानकारी मिली थी। इसके बाद मंगलवार तड़के सफानगरी इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया गया। इस दौरान आतंकियों ने जवानों पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। पुलिस के मुताबिक, मारे गए आतंकियों में से एक अप्रैल में सेना छोड़कर हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था।
कई हमलों में शामिल रहे थे दोनों आतंकी
आतंकियों की पहचान मोहम्मद इदरीस सुल्तान उर्फ छोटा अबरार और आमिर हुसैन (दोनों शोपियां निवासी) के तौर पर हुई। 20 साल की इदरीस पहले सेना का जवान था। दोनों आतंकी घाटी में सेना और आम जनता पर हुए कई हमलों में शामिल रहे थे।
पुलिस के मुताबिक, इदरीस और आमिर आतंकी संगठन हिजबुल से जुड़े थे। ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों को कोई क्षति नहीं हुई। मुठभेड़ के बाद मौके से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया गया।
शोपियां में और आतंकी छिपे होने की सूचना
एक अफसर ने बताया कि शोपियां में और आतंकियों छिपे होने का शक है। पुलिस और सुरक्षाबलों के जवान सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। लोगों को मुठभेड़ वाली जगहों के पास न जाने की हिदायत दी है। क्योंकि यहां विस्फोट का खतरा रहता है। पिछले दिनों मुठभेड़ के बाद धमाके में 6 आम नागरिकों की जान चली गई थी।
भाजपा की सोमवार को आई विधानसभा के 17 प्रत्याशियों की दूसरी लिस्ट में भी इंदौर को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटों की दावेदारी के चक्कर में इंदौर का गणित गड़बड़ा गया है। इनमें इंदौर की क्षेत्र क्रमांक एक से पांच, महू, राऊ, देपालपुर और सांवेर की सीट शामिल है। इसके साथ भोपाल की गोविंदपुरा व उत्तर सीट पर भी पेंच फंसा हुआ है।
इन सभी सीटों में चल रही खींचतान को देखते हुए पार्टी ने तय किया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से चर्चा के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। इंदौर में महाजन अपने बेटे मंदार और विजयवर्गीय अपने बेटे आकाश के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। रविवार को सीएम हाउस में हुई बैठक में भाेपाल की गोविंदपुरा व उत्तर सीट तथा इंदौर की सीटों को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बाद तय हुआ कि शाह और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल से एक बार और बात की जाए।
सुबह सुर बदले, दोपहर में गौर-कृष्णा ने खरीदा पर्चा: भोपाल की गोविंदपुरा से भाजपा की टिकट को लेकर चल रहा ड्रामा सोमवार को भी जारी रहा। नाराज चल रहे बाबूलाल गौर और उनकी बहू कृष्णा गौर के तेवर सुबह तो नरम दिखे, लेकिन दोपहर में दोनों ने नामांकन फॉर्म खरीद कर सरगर्मी फिर बढ़ा दी। बाबूलाल और कृष्णा एक दिन पहले तक निर्दलीय लड़ने की धमकी दे रहे थे। सोमवार सुबह होते-होते दोनों के सुर बदल गए। गौर ने कहा कि उन्होंने अपने मन की बात सुनकर यह निर्णय लिया है कि पार्टी टिकट देगी तो ही चुनाव लड़ेंगे, वर्ना राम नाम जपेंगे। कृष्णा गौर ने कहा कि पार्टी जो भी निर्णय लेगी, उसी हिसाब से काम करेंगी। दरअसल, रविवार रात नरेंद्र सिंह तोमर ने उन्हें काफी देर तक समझाइश दी थी।
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